स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की धर्म यात्रा उन्नाव, हरदोई और नैमिषारण्य होते हुए मंगलवार सुबह महर्षि दधीचि कुंड परिसर पहुंची। यहां दधीचि कुंड के पुरोहित राहुल शर्मा व देवानंद गिरि महाराज ने माल्यार्पण कर शंकराचार्य का स्वागत किया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आगमन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हो गए।
शंकराचार्य ने महर्षि दधीचि तीर्थ की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यह भूमि सनातन संस्कृति और ऋषि-मुनियों की तपस्थली रही है, इसलिए इस पवित्र धरा की महिमा पूरे देश में विशेष रूप से मानी जाती है। उन्होंने गोमाता के संरक्षण और संवर्धन पर जोर देते हुए कहा कि गोसेवा सनातन धर्म की मूल परंपरा है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को गोमाता की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने लोगों से धर्म, संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने का भी आह्वान किया।
अविमुक्तेश्वरानंद ने नैमिषारण्य से सिधौली पहुंचकर सिद्धेश्वर महादेव धाम में दर्शन किए। यहां श्रद्धालुओं ने उनका पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। मंचासीन होने के बाद उन्होंने कहा कि गाय को गोमाता का दर्जा दिलाने के लिए सनातनियों को एकजुट करने की कवायद छेड़ रखी है। मेरी सरकार से मांग है कि गाय को सरकारी अभिलेखों में पशु के स्थान पर माता के रूप में दर्ज किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने इस प्रयोजन के लिए बुधवार को लखनऊ में होने वाले कार्यक्रम में लोगों को आमंत्रित किया। इस दौरान मौजूद जगदीशानंद महाराज ने यात्रा का कारण स्पष्ट किया।
आयोजकों में प्रशांत तिवारी व आचार्य मनीष पांडेय ने शंकराचार्य के सिधौली आगमन पर हर्ष व्यक्त किया। वहीं, नैमिषारण्य से आते समय उनका मिश्रिख,कल्ली चौराहा, संदना व अलादादपुर तिराहे पर श्रद्धालुओं ने माल्यार्पण कर स्वागत किया।