जिले के गांजरी क्षेत्र में बाढ़ का पानी लगातार बढ़ता ही जा रहा है। रास्तों पर बाढ़ का पानी भरा होने से लोग गांवाें में ही कैद हैं। इसके अलावा पचीसा टापू पर नदी कटान कर रही है। गुरुवार रात दो घर कटकर नदी में समा गए। वहीं बैराजों से गुरुवार को भी ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे जलस्तर में और बढ़ोतरी होने के आसार हैं।
रेउसा क्षेत्र के 22 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। हर दिन जलस्तर में इजाफा होने से इस क्षेत्र के सारे रास्ते जलमग्न हो गए हैं। तटीय क्षेत्र की हजारों बीघा खेती इन दिनों बाढ़ में समाई हुई है। रास्ते जलमग्न होने की वजह से फौजदार पुरवा के प्राथमिक विद्यालय की पढ़ाई ठप हो गई है। स्कूल के रास्ते में बाढ़ का पानी बह रहा है। जिसकी वजह से लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं।
इसके अलावा क्षेत्र के जैतहिया, कबिरा बाबा, लोधपुरवा में मौजूद सरकारी स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं टापू पर घाघरा नदी कहर बरपा रही है। बुधवार की रात पचीसा टापू पर नदी ने जबरदस्त तरीके से कटान किया। जिसकी वजह से गांव के खुशीराम व प्रमोद के घर कटकर नदी में समा गए। हालांकि कटान को देखते हुए परिवारों ने पहले ही घरों को खाली कर दिया था। टापू का एक बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में है। \
बाढ़ पीड़ित जहां पानी घटने का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दिन ब दिन जलस्तर में इजाफा ही हो रहा है। बाढ़ की भेंट चढ़ी गुरगुचपुर की पुलिया चार दिन बाद भी दुरुस्त नहीं हो सकी है। इस वजह से क्षेत्र के 20 गांवों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। उधर शारदा, घाघरा व बनबसा बैराजों से गुरुवार को 260150 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे बाढ़ ग्रस्त इलाके में अभी राहत के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
बाढ़ की भयावहता को देखते हुए एसडीएम बिसवां दीपेंद्र यादव क्षेत्र पर नजर रखे हुए हैं। बुधवार की शाम एसडीएम बाढ़ ग्रस्त इलाके में पहुंचे और पीड़ितों से मुलाकात की। एसडीएम ने पीड़ितों को फिर भरोसा दिलाया कि बहुत जल्द ही घर खोने वाले परिवारों को विस्थापित किया जाएगा।
जहां घाघरा नदी उफना रही है, वहीं शारदा नदी में भी बीते दो दिनों से बढ़ोतरी देखी गई है। शारदा नदी काशीपुर के निकट तेजी से कटान कर रही है। बाढ़ खंड द्वारा बनाए गए स्टड शारदा की धार के आगे बेबस नजर आ रहे हैं। कटान तेज होने से ईंट के टुकड़े काशीपुर मंगाए गए। इन ईंट के टुकड़ों से कटान को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। तटीय क्षेत्र के बाशिंदों की माने तो यहां मौजूद स्टड क्षतिग्रस्त हो रहे हैं।