मध्यान्ह भोजन में आए दिन मिल रही गड़बड़ी की शिकायतों के चलते अब इस योजना के संचालक की सख्ती के साथ निगरानी की जाएगी। इस काम में शिक्षा विभाग से इतर कर्मचारियों को भी लगाया जाएगा। अब नई व्यवस्था के तहत राजस्व व पंचायतीराज विभाग के कर्मचारियों के माध्यम से एमडीएम का परीक्षण कराया जाएगा।
उनकी मौजदूगी में ही एमडीएम का वितरण होगा। इसका शुभारंभ इसी माह से होना तय है। परिषदीय विद्यालयों में नौनिहालों को स्कूल में ही पका-पकाया भोजन दिया जाता है। इसके लिए शासन की तरफ से खाद्यान्न व कनवर्जन कास्ट दी जाती है, लेकिन स्कूलों में एमडीएम न बनने की अक्सर शिकायतें आती रहती हैं।
अभी तक मध्यान्ह भोजन की निगरानी शिक्षा विभाग द्वारा की जाती है। इसके बावजूद खाना न बनने की शिकायतों पर प्रभावी रोकथाम नहीं लग पा रही है। इस समस्या को देखते हुए शासन ने नया फरमान जारी किया है। प्रदेश सरकार के सचिव हीरालाल गुप्ता ने एमडीएम की निगरानी के लिए बेसिक शिक्षा विभाग से अलग कर्मचारियों को लगाने का निर्देश दिया है।
जिसके तहत राजस्व व पंचायतीराज विभाग के कर्मचारियों को लगाया जाएगा। इन कर्मचारियों की मौजदूगी में ही एमडीएम का वितरण होगा। पहले यह व्यवस्था 10 जुलाई से लागू होनी थी, लेकिन चालू सत्र में शासन ने एमडीएम का मेन्यू बदल दिया है। यह मेन्यू 15 जुलाई से प्रभावी होगा।
इस मेन्यू की खास बात यह है कि पहली बार नौनिहालों को बुधवार को दूध दिया जाएगा। शासन ने बदले हुए नवीन मेन्यू का गुणवत्तापूर्वक पालन सुनिश्चित कराने के लिए सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह दूध का विशेषकर सत्यापन करें। अगर कही कोई समस्या आती है तो जानकारी शिक्षा विभाग को दी जाएगी।
लापरवाही बरतने वाले शिक्षक व प्रधान के खिलाफ जांच आख्या के आधार पर कार्रवाई भी की जाएगी। यह व्यवस्था 22 जुलाई से लागू होगा। शासन से निर्देश मिलते ही विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
जिला समन्वयक मध्यान्ह भोजन बृजमोहन सिंह ने बताया कि शासन ने राजस्व व पंचायतीराज विभाग के कर्मचारियों से एमडीएम का सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। निर्देर्शों के तहत 22 जुलाई से सत्यापन शुरू हो जाएगा।