सीतापुर। जिले में पंचायत चुनाव का आरक्षण आने के बाद सीटों को लेकर तस्वीर साफ होते ही अब खुद चुनाव नहीं लड़ पाने वाले दावेदारों ने अचानक यू-टर्न ले लिया है। आरक्षण का विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है। विकल्प के तौर पर वह भाभी, पत्नी, मां व वफादार नौकर की पत्नी को चुनावी मैदान में उतारने के लिए तैयारियों में जुट गए हैं। ऐसे में गांवों में चुनावी मुकाबला और रोमांचक होने जा रहा है।
जिले की कई ग्राम पंचायतों में पिछले कई बरस से चुनावों में मन पसंद सीट आ रही थी। उम्मीद थी कि इस बार भी सीटें उनके मन माफिक ही आएंगी। इस बार आरक्षण ने बड़े-बड़े दिग्गजों के समीकरण को उलट-पलट कर दिया है। सीटों में बदलाव की बयार आरक्षण जारी होने से पहले ही बहने लगी थी। इस बार शासन ने चुनाव में और अधिक पारदर्शिता और मनमानी को रोकने के लिए 1995 से लेकर 2015 तक के पंचायत चुनाव की समीक्षा की थी।
इसी आधार पर तय हुआ था कि जो गांव कभी एससी, ओबीसी के लिए आरक्षित नहीं किए गए हैं, उन्हें जनसंख्या के आधार पर उस सीट के लिए आरक्षित किया जाएगा। ऐसे संकेत पहले से ही मिलने की वजह से बेचैन दिख रहे दावेदारों की धड़कनें बुधवार को त्रिस्तरीय पंचायत चुुनाव के लिए जारी हुए आरक्षण के बाद और बढ़ गई हैं। जिले के ऐलिया, महोली, परसेंडी, मछरेहटा, मिश्रिख, महमूदाबाद, सिधौली, कमलापुर समेत कई ब्लॉकों की ग्राम पंचायतों में कई ऐसे दिग्गज दावेदार थे जो चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर चुके थे।
गांव में चुनावी बिसात भी बिछा चुके थे। वोटरों को रिझाने से लेकर मनाने के लिए कवायदें जारी थी, लेकिन ये सीटें अब महिलाओं के लिए आरक्षित होने की वजह से उनके खुद के चुनाव लड़ने के मंसूबों पर पानी फिरा जरूर है, लेकिन प्रधानी की सीट अपने ही घर में लाकर उसकी बागडोर खुद के हाथों में करने के लिए अब ऐसे दावेदारों ने यू-टर्न ले लिया है। मसलन, जोर आजमाइश और तेज कर दिया है।
आरक्षण के फेर में फंसने के बाद खुद के चुनाव लड़ने पर लगी रोक के बावजूद अब ऐसे दावेदारों ने आरक्षण का विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है। ऐसे लोगों ने अब पत्नी, मां और भाभी पर दांव खेल दिया है। घूंघट की ओट में वह चुनावी नैया को पार करने के लिए तैयारियों में जुट गए हैं। अब मतदाताओं के सामने पत्नी, भाभी और माता का चेहरा रखकर उन्हें समर्थन की अपील का सिलसिला शुरू कर दिया है। ऐसे लोगों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पत्नी, माता और भाभी के पोस्टर बनाने के लिए आर्डर देने शुरू कर दिए हैं।
वफादारों की शुरू हुई खोज
जिले की कई ग्राम पंचायतों में कई रसूखदार लोगों का दबदबा था। हर बार वह प्रधानी का ताज उनके ही सिर सजता था, लेकिन सीटों में उलटफेर की वजह से सीट उनके हाथ से निकल गई है। कई जगहों पर सीटें पिछड़ा वर्ग, पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए तो कहीं पर सीट अनुसूचित जाति के खाते में चली गई है। ऐसे में रसूखदार लोग सीटों के समीकरण के हिसाब में चुनावी मैदान में वफादार प्रत्याशियों को उतारने की पुरजोर कोशिश में लग गए हैं। कोई अपने नौकर तो महिला आरक्षित सीट पर उसकी पत्नी को लाने की तैयारी शुरू कर दी है।
प्रधानी से लेकर जिपं तक का यही हाल
सीटों में बदलाव की वजह से खुद चुनाव नहीं लड़ने वाले संभावित दावेदारों ने प्रधानी के चुनाव से लेकर जिला पंचायत सदस्य तक के चुनाव में यही विकल्प तलाश लिया है। विश्वसनीय व्यक्ति के चेहरे से चुनाव में पीछे से मदद करने के लिए ताल ठोंक दी है। मछरेहटा, बिसवां, महोली, महमूदाबाद ब्लॉक में कई जिला पंचायत सदस्य पदों के दावेदारों ने सीट मन माफिक नहीं आने के बाद अब अपने करीबी का सहारा लेने के लिए उसे आगे कर रहे हैं। अब चुनावी ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।