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मिश्रिख पहुंचा रामादल, पंच कोसी परिक्रमा शुरू

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सीतापुर के मिश्रिख में पंचकोसी परिक्रमा करते साधु-संत। (संवाद) - फोटो : SITAPUR
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मिश्रिख (सीतापुर)। 84 कोसी परिक्रमा बुधवार भोर अपने अंतिम पड़ाव मिश्रिख पहुंच गई। मिश्रिख में पांच दिन तक यह परिक्रमा रुकेगी। इस दौरान परिक्रमार्थी पांच दिन तक मिश्रिख की पंच कोसी परिक्रमा करेंगे। उसके बाद 28 मार्च को परिक्रमा कर घरों को लौट जाएंगे।
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84 कोसी परिक्रमा नैमिषारण्य से शुरू होकर हरदोई जनपद के पड़ावों को होते हुए अपने अंतिम 11वें पड़ाव मिश्रिख को पहुंच गई है। परिक्रमा कोल्हुआ बरेठी से भजन कीर्तन करते हुए मिश्रिख पहुंची।
तमाम साधु संत व परिक्रमार्थी कोल्हुआ बरेठी में न रुककर एक दिन पहले ही मिश्रिख आ गए थे। लेकिन तय कार्यक्रम के मुताबिक यह बुधवार को पहुंचकर सबसे पहले पंच कोसी परिक्रमा की शुरुआत की। उसके बाद अपने स्थानों पर ठहर गए। अब यह परिक्रमार्थी पांच दिन तक मिश्रिख में ही रुकेंगे। इस दौरान सुबह पंच कोसी परिक्रमा करेंगे। उसके बाद 28 मार्च को परिक्रमा करके अपने घरों को लौट जाएंगे।
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इन पांच दिनों में मिश्रिख में काफी भीड़भाड़ मौजूद रहेगी। साधु संत अपने विविध रूपों में यहां पर दिखाई दे रहे है। कोई भजन कीर्तन में मस्त है तो कोई भस्म लगाकर अपने ईष्ट देवता की प्रार्थना कर रहा है। इन परिक्रमार्थियों को देखने के लिए आस पड़ोस के गांवों के लोग मिश्रिख पहुंच रहे है। वह साधु संतों का आशीर्वाद ले रहे है। इस दौरान मिश्रिख के आश्रमों में पांच दिनों तक सुबह शाम धार्मिक कार्यक्रम होते रहेंगे।
भंडारे का चलता रहा सिलसिला
परिक्रमा मिश्रिख पहुंचते ही भक्तों ने परिक्रमार्थियों के लिए भंडारा शुरू कर दिया है। श्री नारायण आश्रम वृंदावन अखंड नारायण अन्नय क्षेत्र मथुरा के तत्वावधान में स्वामी सुरेशानंद परमहंस ने परिक्रमार्थियों को फल वितरित किए। स्वामी ने बताया कि पंच कोसीय परिक्रमा का पौराणिक महत्व है। परिक्रमा करने से कष्ट दूर होते है। इसका बहुत ही पुण्य मिलता है।
यहां पर पांच दिनों तक आश्रम की तरफ से लगातार भंडारा किया जाएगा। इस दौरान स्वामी विनोदानंद सहित अन्य लोग मौजूद रहे। अन्य भी तमाम लोगों द्वारा भंडारों का आयोजन किया गया। जिसमें दिनभर लोग प्रसाद ग्रहण करते रहे।
पड़ाव पर छाई अव्यवस्थाएं
मिश्रिख में अब परिक्रमा पांच दिनों तक रुकेगी। यहां की अव्यवस्थाओं ने परिक्रमार्थियों को छकाना शुरू कर दिया है। परिक्रमा मेले में परिक्रमार्थियों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए हर बरस पाइप लाइन डाली जाती है। लेकिन इस बार पाइप लाइन से पानी की सप्लाई शुरू नहीं की गई है। पेयजल के लिए लगे हैंडपंप खराब पड़े है।
ज्ञान सागर के घर के सामने लगा हैंडपंप काफी दिन से बंद है। जबकि नगर पालिका द्वारा हर बार परिक्रमा आने से पहले व्यवस्थाएं कर ली जाती है। लेकिन इस बार कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है। इसकी वजह से परिक्रमार्थी पेयजल के लिए परेशान घूम रहे हैं। पानी के टैंकरों की व्यवस्था भी नहीं है। नगर पालिका की यह लापरवाही परिक्रमार्थियों पर भारी पड़ रही है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अनुमति नहीं
पांच दिन तक परिक्रमा मिश्रिख में रुकती है। इस दौरान यहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे। जिससे परिक्रमार्थियों का मिश्रिख में समय आसानी से व्यतीत हो जाता था। लेकिन इस बार सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की अनुमति नहीं दी गई है। इसकी वजह से परिक्रमार्थी परेशान है। उनको अपना समय काटना मुश्किल हो रहा है।
बैरियर बने मुसीबत
सिधौली, मछरेहटा, पिसावां, नैमिषारण्य मार्ग पर पुलिस द्वारा बैरियर लगा दिए गए है। यहां पर आने जाने वाले वाहनों को रोक लिया जाता है। ऐसे में वाहन स्वामियों को बहुत दिक्कत हो रही है। वाहन स्वामियों का कहना है बैरियर लगे हैं, अगर हम लोग नैमिषारण्य से चलकर सीतापुर को जा रहे है, तो रोक लिया जाता है। कम से कम रूट डायवर्जन तो होना चाहिए। अगर इस मार्ग से नहीं जा सकते है तो दूसरा रूट बताएं। लेकिन पुलिस महकमे ने रूट डायवर्जन का कोई प्लान नहीं बनाया है। इससे मिश्रिख से गुजरने वाले लोग काफी परेशान रहते है।
गुल रही बिजली
परिक्रमा स्थान पर 24 घंटे विद्युत आपूर्ति का रोस्टर तय किया गया है। लेकिन यह पूरी तरह से फॉलो नहीं हो पा रहा है। मंगलवार की रात को करीब तीन घंटे तक लगातार बिजली गुल रही। मिश्रिख में लाखों परिक्रमार्थी होने से इनको काफी दिक्कतें आएगी। मिश्रिख में परिक्रमा पड़ाव पर जगह कम होने से यह लोग आस पड़ोस के खेत खलिहानों में ठहरे हुए है। यहां पर जब बिजली गुल हो जाती है तो परिक्रमार्थियों के पास प्रकाश के कोई साधन न होने से बहुत दिक्कतें आई।
गंदगी से दिक्कत
परिक्रमा अपने आखिरी पड़ाव पर ठहर गई है। लेकिन यहां पर नगर पालिका द्वारा साफ-सफाई नहीं कराई जा रही है। परिक्रमा मेले में गंदगी की भरमार है। स्वचलित टॉयलेट की संख्या बेहद कम होने से लोगों को शौच के लिए खुले में जाना पड़ रहा है। वहीं इन शौचालयों में भी गंदगी की भरमार है।
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