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हर-हर महादेव के जयघोष संग हरैया पहुंचा रामादल

Tue, 28 Feb 2017 10:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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पूजा - फोटो : अमर उजाला
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कोरौना पड़ाव पर ठहरे श्रद्धालु हर-हर महादेव का जयघोष करते हुए हरैया पड़ाव के लिए मंगलवार भोर कूच कर गए। रामधुन में मस्त साधु-संत शंख, घंटा, घडिय़ाल की धुन पर सीताराम का नाम लेते हुए गोमती पुल पार कर हरदोई जिले की सीमा में प्रवेश कर गए। श्रद्धालुओं ने रास्ते में पड़ने वाले मंदिरों में माथा टेकते हुए सुख-समृद्धि की कामना की। यह परिक्रमा 9 मार्च को मिश्रिख पहुंचकर संपन्न होगी। 
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सोमवार की भोर लाखों की संख्या में श्रद्धालु नैमिषारण्य से पहले पड़ाव कोरौना पहुंचे थे। यहां पर श्रद्धालुओं ने धर्म नगरी बसाई और हवन पूजन किया। देर रात तक पड़ाव पर संत, महंत व साधु समेत कथावचक श्रद्धालुओं को ज्ञान के उपदेश देते रहे।

भोर में श्रद्धालुओं ने हरैया पड़ाव के लिए कूच कर दिया। श्रद्धालुओं ने सीतापुर जिले की सीमा पर मौजूद कैलाश आश्रम में पूजा अर्चना की, आदि गंगा गोमती को प्रणाम करते हुए श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के जयकारे लगाए। जिसके बाद हर हर महादेव का जयघोष करते हुए श्रद्धालु पुल के रास्ते हरदोई सीमा में प्रवेश कर गए।
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पुल की सीमा तक सीतापुर जिले का पुलिस बल लगा था। जबकि पुल के उस पार हरदोई जिले के पुलिस कर्मी तैनात थे। संत महंतों का रेला जो मंगलवार की भोर पुल से गुजरना शुरू हुआ, वह दोपहर तक जारी रहा।

हाथी, घोड़े, पालकी, लग्जरी वाहनों पर सवार संत व महंत पैदल चल रहे श्रद्धालुओं के साथ आहिस्ता आहिस्ता हरैया पड़ाव की तरफ बढ़ रहे थे। जो श्रद्धालु हरैया पड़ाव पर पहुंच रहा था, वह ठहरने का स्थान खोजकर अपने तंबू व टेंट लगा रहे थे।

देर शाम तक हरैया में श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी था। मंगलवार की रात हरैया पड़ाव पर धर्म नगरी सज चुकी थी, जहां पर चारों तरफ भक्ति धुन गूंज रही थी। अब यह परिक्रमा चार दिन हरदोई जिले में ही रहेगी।

1 मार्च को रामादल हरैया से नगवा कोथावां पड़ाव पर पहुंचेगा, 2 मार्च को नगवां कोथावां से अपने चौथे पड़ाव गिरधरपुर उमरारी को पहुंचेगा, 3 मार्च को रामादल पांचवें पड़ाव साखिन गोपालपुर पहुंचेगा। जिसके बाद 4 मार्च की भोर यह यात्रा हरदोई जिले से सीतापुर के लिए वापस कूच करेगी।

4 मार्च को साखिल गोपाल पुर से चली परिक्रमा, सीतापुर की सीमा में प्रवेश कर देवगवां पहुंचेगी, जहां पर रामदल अपना पड़ाव डालेगा। यह परिक्रमा 9 मार्च को मिश्रिख पहुंचकर संपन्न होगी। 
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