गोंदलामऊ (सीतापुर)। 84 कोसी परिक्रमा पर निकले रामादल ने शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त में हत्याहरण तीर्थ में डुबकी लगाकर जाने-अनजाने में हुए पापों के लिए प्रायश्चित किया। इसके बाद बोल कड़ाकड़ सीताराम का जयघोष करते हुए परिक्रमार्थी अपने अगले पड़ाव गिरधरपुर उमरारी की ओर चल पड़े।
राम नाम का जाप करते हुए परिक्रमार्थियों ने दोपहर तक चौथे पड़ाव पहुंचकर डेरा डाल दिया। भक्ति भावना से परिपूर्ण गीत-संगीत के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह पूरे चरम पर दिखा। चौथे पड़ाव पर स्थानीय लोग साधु-संतों व परिक्रमार्थियों के सेवा-सत्कार में जुट दिखे। पड़ाव स्थल पर संतों की वाणी तो कहीं भजन-कीर्तन की मधुर धुन गुंजायमान होने लगीं।
नैमिषारण्य से 18 फरवरी को पुण्य पथ पर निकला रामादल आस्था की डगर पर निरंतर गतिमान है। शुक्रवार को 84 कोसी परिक्रमा अपने तीसरे पड़ाव नगवा कोथावा पहुंची थी। यहां रात्रि विश्राम के बाद परिक्रमार्थियों ने शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त में हत्या हरण तीर्थ में स्नान किया। इस प्राचीन तीर्थ में स्नान करने का विशेष महत्व है।
मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान राम ने रावण का वध करने के बाद ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्त होने के लिए इसी हत्याहरण तीर्थ में स्नान किया था। इस ऐतिहासिक सरोवर में स्नान करने से मनुष्य को जाने-अनजाने हुए सभी पापों से मुक्ति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। शनिवार सुबह चौथे पड़ाव की ओर रामादल बढ़ चला।
ढोल-मंजीरे की धुन पर राम नाम का संकीर्तन करते परिक्रमार्थी जिधर से निकले वातावरण भक्तिमय हो जाता। कोई संत रथ व तो कोई पालकी से धर्मयात्रा पर बढ़ता दिखा।
कई श्रद्धालु पैदल तो तमाम बाइक, ट्रैक्टर-ट्रॉली व कार से परिक्रमा कर रहे हैं। इस बीच श्रद्धालुओं ने ऋण मोचन तीर्थ, सूर्यनारायण मंदिर, गिरजा तीर्थ, विरजा तीर्थ और नर्मदेश्वर आदि तीर्थस्थलों का दर्शन किया। पुण्य पथ पर निकला रामादल शनिवार दोपहर अपने चौथे पड़ाव गिरधरपुर उमरारी पहुंचा।
परिक्रमार्थी चौथे पड़ाव स्थल पर डेरा डालकर भजन-कीर्तन में लीन हो गए। संत-महंत अपने डेरे पर प्रवचन करने लगे, कई श्रद्धालु संतों की वाणी सुनने पहुंच गए। स्थानीय ग्रामीण साधु-संतों व श्रद्धालुओं की सेवा-सत्कार को आतुर दिखे। हर तरफ भक्तिमय वातावरण में धर्म उपदेशों व राम नाम का स्वर गुंजायमान होता रहा।