सुगम यात्रा की मंशा लेकर रेलवे स्टेशन पहुंचने वाले यात्रियों को तरह-तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। रेलवे कर्मी अपने में मगन इधर-उधर टाइम पास करते रहते हैं। यात्रियों की समस्या से इनका कोई लेना-देना नहीं है।
रेल बजट में यात्रियों की सहूलियत के लिए सरकार जो खाका खींचती है, उसे अमल में लाने का कोई प्रयास नहीं किया जाता, लिहाजा, हालात बदतर होते चले जाते हैं।
छोटी लाइन रेलवे स्टेशन पर अप-डाउन मिलाकर 12 जोड़ी ट्रेनें चलती हैं। इन पर हैं। यात्रियों को सुविधा के नाम पर यहां कुछ नहीं मिलता। टिकट लेने के लिए चार कांडटर हैं, पर इनमें से ज्यादातर एक या दो ही खुलते हैं।
टिकट देने वाले कर्मचारी भी पूरी तरह मनमानी पर उतारू रहते हैं। फुटकर पैसे न देने पर यात्रियों से उलझना इनका शगल बन गया है। प्लेटफॉर्म पर चारों ओर बिखरी गंदगी यहां की पहचान है।
वाटर कूलर लगा तो है, लेकिन चालू हालत में नहीं है। हैंडपंप भी खराब है। पूछताछ कांउटर खुला तो रहता है, पर यहां ट्रेनों के संबंध में जानकारी देने के लिए तलाश करने पर भी कोई नहीं मिलता। यह हालात तब हैं, जब हाल में ही रेलवे के डीआरएम यहां का मुआयना कर चुके हैं।