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यहां सर्द रातें ढाती हैं सितम

Sun, 24 Jan 2016 11:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
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उनके परिवार हैं तो खस्ताहाल आशियाने भी। जिन जगहों पर आशियाने हैं, वह जमीन भी उनकी नहीं। घर ऐसे बने हैं जिनके आगे खंडहर भी शरमा जाए। फूस की छत व फूस की ही दीवारें। छत ऐसी कि आसमान साफ झलकता है।
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दीवारें ऐसी कि हवा के झोंके घर में बे-रोकटोक पहुंच जाते हैं। लब्बोलुआब यह कि ओस, कोहरा व सर्द हवा इन झोपड़ियों पर सीधा हमला करती हैं। ऐसे हालात के बावजूद उन झोपड़ियों में लोगों के परिवार रहने को मजबूर हैं।

कोई एक-दो या दर्जनों नहीं बल्कि सैकड़ों परिवार इसी स्थिति में रहने को मजबूर हैं जिनके ऊपर ये सर्द रातें जमकर सितम ढाती हैं। यह दर्द है जिले के गांजरी क्षेत्र का जिससे जिम्मेदार लोगों का कोई सरोकार नहीं।  जैतहिया निवासी रामचंद्र, बुधराम व गुलाब चंद चहलारी मार्ग पर झोपड़ी डालकर परिवार के साथ रह रहे हैं।
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परिवार की हालत यह है कि गर्म बिस्तर की बात कौन कहे, शरीर पर ढंग के कपड़े भी मयस्सर नहीं हो रहे हैं। परिवार के मुखियाओं का कहना है कि जैतहिया गांव घाघरा नदी के किनारे था। बाढ़ के साथ कटान के कारण खेती व घर दोनों नदी में समा गए।

आशियाने भर की जगह न मिलने पर अब सड़क पर ही झोपड़ी डालकर गुजर-बसर कर रहे हैं। झोपड़ी की छत से सीधे आसमान नजर आता है। ओस सीधे घर में आती है, ऐसे में बिस्तर बचाना भी मुश्किल हो जाता है। वहीं झोपड़ी की टटिया से कोहरा व सर्द हवा सीधे घर में प्रवेश कर जाती है।

इस वजह से जितनी ठिठुरन घर के बाहर होती है, उतनी ही घर के अंदर भी होती है। इस घर का होना न होना एक बराबर है। इस सड़क पर कई ऐसे परिवार भी हैं जिनके सिर पर छप्पर भी नहीं है, वे सिर्फ पॉलीथिन की शीट तानकर रह रहे हैं। कोठार निवासी अनीस पैरों से निशक्त है।

वह अपने परिवार के साथ शेखनपुरवा के निकट झोपड़ी डालकर रह रहा है। गोड़ियन पुरवा निवासी अशर्फी लाल, मेड़ी लाल व सोहन लाल ने रास्ते पर झोपड़ी डाल रखी है। सिसैया बाजार निवासी बाबूनंद, नगीनापुरवा के कपूरचंद, पेशकार आदि ग्रामीण सड़कों व गलियारों पर झोपड़ी डालकर रह रहे हैं।

यहां से घाघरा नदी करीब है, इस वजह से सर्द हवा कुछ अधिक कहर ढाती है। क्षेत्र के करीब 400 ऐसे परिवार हैं जो बेहद दयनीय हालत में रह रहे हैं। इन परिवारों को शासन की तरफ से कोई मदद नहीं दी गई है और न ही किसी समाजसेवी संस्था ने इनकी तरफ हाथ बढ़ाए हैं।

इस कारण ये परिवार ठिठुरते हुए दिन व ठिठुरते हुए रात काट रहे हैं। अगर कोई ध्यान दे तो इन परिवारों का दर्द कम हो सकता है। कुल मिलाकर ऐसे परिवारों पर सर्दी कुछ अधिक ही सितम ढा रही है।
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