शहर के नैमिषपुरम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को परीक्षित शिक्षा के साथ समापन हो गया। शाम को भजन का आयोजन किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
रविवार को श्रीहरिहरि सेवा समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में मुंबई के वाचक स्वामी चिदंबरानंद महाराज ने कहा कि चाहे रामायण हो, गीता हो या महाभारत हो, हर ग्रंथ मानव को जीने की शैली का संदेश देते हैं।
स्वामी चिदंबरानंद महाराज ने कहा कि जैसा करोगे, वैसा फल मिलेगा, जो बोओगे वो कटोगे। जीवन जीने की कला का मुख्य उदाहरण तो गीता में दिया गया है। यह संवाद ऐसे वक्त श्रीकृष्ण ने दिया था, जब महाभारत में अर्जुन धर्म संकट में पड़ गए थे। धर्म संकट आने पर भगवान ने अर्जुन को सत्य का बोध कराय।
भगवान ने समय-समय पर राह भटक रहे लोगों को धर्म व उनके कर्म के प्रति सजग किया। इसी तरह से राजा परीक्षित को भी भगवान श्रीकृष्ण ने उपदेश दिए। यदि अपने जीवन को बेहतर बनाना है तो अपने धर्म के ईश्वर का अनुकरण करना जरूरी होगा।
मर्यादित जीवन के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का अनुकरण करें। श्रीकृष्ण का अनुकरण करें। हवन पूजन के साथ कथा का समापन किया गया। प्रसाद वितरण के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। वहीं शाम को भजन संध्या का भी आयोजन किया गया।
इस मौके पर हरिहर सेवा समिति के अध्यक्ष उमा शंकर मिश्रा, कैलाश जगवानी, सरिता देवी, कमला देवी, सचिन गुप्ता, दिनेश चंद्र मिश्रा व कमलेश मंगल बाजपेयी आदि मौजूद रहे।