सीतापुर। जिले में प्रसव के दौरान होने वाली गर्भवतियों की बढ़ती मौत की रोकथाम लेकर प्रशासन अब सख्ती बरतेगा। इसके लिए सभी सीएचसी पर निगरानी बढ़ाने के लिए निर्देशित किया गया है। सितंबर माह में अब तक प्रसव के दौरान नौ गर्भवतियों की मौत हो चुकी है। इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य केंद्रों पर भर्ती गर्भवतियों की नियमित जांच कराने और उनकी सेहत पर नजर रखने का निर्देश सीएमओ को दिया है।
स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी ने गर्भवतियों की मौत पर चिंता जाहिर की है। कहा कि इसकी रोकथाम के लिए सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती गर्भवतियों की जांच नियमित तौर पर कराई जाए ताकि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी को चिह्नित कर उनकी विशेष निगरानी की जा सके। निगरानी के दौरान किसी गर्भवर्ती में गंभीर लक्षण दिखाई देने पर उसे समय रहते उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए रेफर किया जाए।
सीएचसी अधीक्षकों को इस पूरी व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही विभागीय स्तर पर मातृ मृत्यु के प्रत्येक मामले की समीक्षा भी की जाएगी। इस दौरान महिला को गर्भावस्था के दौरान मिली स्वास्थ्य सेवाओं, जांच, उपचार, रेफरल और अस्पताल पहुंचने की स्थिति की जानकारी भी जुटाई जाएगी, ताकि मौत के कारणों की पहचान कर उनमें सुधार किया जा सके।
मातृ सुरक्षा केंद्र के जरिये परखी जाएगी सेहत
प्रत्येक सीएचसी पर मातृ सुरक्षा केंद्र बनाए गए हैं। यह केंद्र 24 घंटे संचालित रहते हैं। इनके जरिये गर्भतियों की मॉनिटरिंग की जाएगी। हाई रिस्क वाली महिलाओं को फोन करके उनको जांच करवाने की सलाह दी जाएगी। अगर महिलाओं को सीएचसी आने जाने में कोई दिक्कत हो रही है तो एंबुलेंस भेजकर उनको इलाज दिया जाएगा। सीएमओ डॉ. सुखरंजन समद्दर ने बताया कि इसके लिए सभी सीएचसी अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह महिलाओं को इलाज की बेहतर सुविधाएं मुहैया कराएं।