बिना अनुमोदन बजट खपाने वाली ग्राम पंचायतें जांच के दायरे में आ गई हैं। संबंधित ग्राम पंचायतों के प्रधान व सचिवों पर केस दर्ज होगा। जांच रिपोर्ट आते ही दोषी प्रधान और सचिवों पर केस दर्ज किया जाएगा।
जिले की 244 ग्राम पंचायतों ने बिना अनुमोदन के ही 14वें वित्त आयोग का धन खर्च कर दिया। डीएम अमृत त्रिपाठी ने इस मामले में नाराजगी जताते हुए दोषी प्रधान व सचिवों पर कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।
मालूम हो ग्राम पंचायतों के विकास के लिए 14वें वित्त आयोग से धन प्राप्त होता हैं उससे गांवों व मजरों में सड़क, नाली, पेयजल आदि को लेकर कार्य कराए जाते हैं। इस शासन ने निर्देश दिए थे कि ग्राम पंचायतों की धनराशि बिना कार्ययोजना बने और स्वीकृत खर्च नहीं की जा सकेगी।
यही नहीं ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना सॉफ्टवेयर प्लान प्लस पर अपलोड भी कराई जाएगी। जिले में 1601 ग्राम पंचायतें हैं। जिनमें से 244 ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना अनुमोदित नहीं हुई हैं। फिर भी इन ग्राम पंचायतों ने खातों में पहुंचा 14वें वित्त आयोग का करीब तीन करोड़ रुपया खर्च कर डाला।
यह मामला जब डीएम ने पहुंचा तो उन्होंने डीपीआरओ को कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिए। जिसके बाद हरकत में आए डीपीआरओ तुलसीराम ने इस मामले में एडीओ पंचायतों को लगाकर जांच का कार्य शुरू किया है। डीपीआरओ ने बताया जल्द जांच रिपोर्ट आ जाएगी। इसमें जिन ग्राम पंचायतों ने रुपये निकालकर काम ही नहीं कराया है उनके प्रधान व सचिवों पर केस दर्ज होगा।