सीतापुर। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना ‘कार और कोठी’ वालों के निशाने पर है। पात्र न होते हुए भी उनकी नजर इस योजना के आशियानों पर गड़ी है। ये चौंकाने वाला खुलासा डूडा की जांच में हुआ है। इस खुलासे के बाद जिम्मेदार भी हैरान हैं। बड़ी गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद अपात्रों के आवेदनों को निरस्त कर उनके नाम अपात्रों की सूची में डाल दिए गए हैं। दरअसल, केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना का जिले में बुरा हाल है। योजना का लाभ पाने के लिए शहरी क्षेत्र में प्लाट होना चाहिए। उसी प्लाट को दिखाकर इस योजना का लाभ लिया जाता है।
डूडा से फाइल पास होने के बाद लाभार्थी के खाते में पहली किश्त का 50 हजार, दूसरी किश्त का डेढ़ लाख और तीसरी किश्त के 50 हजार रुपये आते हैं, लेकिन इसमें हो रही गड़बड़ी किसी से छिपी नहीं है। पात्रों को दरकिनार कर अपात्रों को आवास देने के मामले भी जिला सुर्खियों में रहा है। हालांकि, जिम्मेदार सभी पात्रों को लाभ देने का दावा करते थक नहीं रहे है, लेकिन उन्हीं की जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे से हुक्मरानों के होश उड़ गए हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो 2020-21 में शहरी क्षेत्र से इस योजना का लाभ पाने के लिए लोगों ने करीब 3700 ऑनलाइन आवेदन किए।
इसके बाद संबंधित विभाग डूडा ने ऑनलाइन आवेदनों की जांच कराई। जांच में खुलासा हुआ कि करीब 500 लोग ही पात्र की श्रेणी में है, जबकि 3200 लोग ऐसे पाए गए जो अपात्र हैं। उन्हें किसी भी कीमत पर प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना का लाभ मिल ही नहीं सकता था, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने ऑनलाइन आवेदन कर रखा था। विभाग की जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद ऑनलाइन आवेदनों को निरस्त कर दिया गया है और इन लोगों के नाम भी अपात्रों की सूची में डाल दिए गए हैं।
डूडा के जानकारों की मानें तो एक साल में इतनी संख्या में सिर्फ शहरी क्षेत्र से आवास के लिए पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदनों के आने के बाद जिम्मेदारों को गड़बड़ी का शक हुआ। इसकी जांच के लिए नगर पालिका, संबंधित तहसील का कर्मी (जिस तहसील क्षेत्र का आवेदनकर्ता वाला है) व राज्य सरकार की ओर से इस योजना में शामिल की गई एक निजी संस्था के कर्मचारी की टीम गठित की गई। टीम ने मौके पर जाकर आवेदन करने वालों के बारे में पता लगाया, उनकी स्थित पता की तो चौंकाने वाली बात सामने आई। किसी का आलीशान घर बना है तो कोई लग्जरी कार का मालिक निकला। टीम ने फोटो और संबंधित जानकारियां जुटाकर विभाग को सौंपी। इसी आधार पर उन्हें अपात्र घोषित करते हुए आवेदनों को निरस्त करने की कार्रवाई की।
जिम्मेदारों की मानें तो कई मामले ऐसे भी पकड़ में आए हैं, जिसमें लोगों ने आधार से खेल किया। आवेदन में लगने वाले आधार कार्डों में इन लोगों ने गांव का पता ही बदल दिया ताकि खेल आसानी से पकड़ा न जा सके, लेकिन जांच में हकीकत सामने आ ही गई।
विभागीय सूत्रों की मानें तो इस योजना का लाभ लेने के लिए कई ऐसे लोगों ने फाइलें पास करा लीं गईं, जिनकी जमीन को लेकर विवाद था। विभाग ने पैसे जारी करने के बाद भी मकान नहीं बनवाने पर ऐसे कई लोगों से करीब 20 लाख वापस भी कराए हैं। इसकी पुष्टि खुद डूडा अधिकारी ने की है।
विभाग के एक ही कर्मचारी ने बताया कि जांच में जो भी लोग अपात्र पाए गए हैं, उनके नाम और फोटो के साथ डाटा भी जुटा लिया गया है। ये जानकारी स्टोर कर ली गई है ताकि भविष्य में ऐसे लोग फिर से आवास के लिए आवेदन करते हैं तो गड़बड़ी पकड़ने में आसानी हो।
तीन लाख से अधिक सालाना आय न हो।
नगर पालिका क्षेत्र में जमीन का स्वामित्व हो।
योजना का लाभ लेने वाले का पक्का मकान न हो।
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना का लाभ पात्रों को ही दिया जाता है। 2020-21 में शहरी क्षेत्र से करीब 3700 लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किए। शहरी क्षेत्र में इतनी संख्या में लोगों को घर की जरूरत है, इस बात से शक हुआ। टीम गठित कर आवेदनकर्ताओं की जांच कराई गई। टीम ने सर्वे किया, जिसमें करीब 3200 ऐसे लोग मिले जो पात्र की श्रेणी में नहीं पाए गए। किसी ने जो पता दिया, वहां उसकी जमीन नहीं है तो किसी का आधार ही गड़बड़ मिला। इनके आवेदन निरस्त कर अपात्र घोषित किया गया है। अभी मामले में जांच चल रही है। पूरी पारदर्शिता के साथ योजना का लाभ पात्रों को ही दिया जा रहा है।
- सुधीर गिरी, परियोजना अधिकारी, डूडा