सीतापुर। मछरेहटा की ग्राम पंचायत बहोरनपुर में मियावाकी तकनीक से लगाए गए पौधों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। जानवर इन पौधों को चट कर चुके हैं। जिस स्थान पर पौधरोपण हुआ था, अब वहां सिर्फ जंगली घास बची है।
बहोरनपुर में 6.99 लाख रुपये की लागत से वित्तीय वर्ष 2024-25 में मियावाकी तकनीक से पौधरोपण किया गया था। जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण एक भी पौधा नहीं बचा है। वहां पर सिर्फ पौधों के डंठल ही बचे हैं। पौधों को जानवर चट कर चुके हैं। अब सिर्फ घास उगी है। ग्रामीण कमलेश, विनीत, रामनरेश, रामलखन, अनुराग व अन्य ने ब्लॉक के अधिकारियों से नए सिरे से पौधरोपण कराने की मांग की है। उनकी मांग है कि इस बार जब पौधरोपण हो तो उनके संरक्षण की व्यवस्था भी की जाए।
जापान की तकनीक है मियावाकी
इस तकनीक के तहत बड़े पौधों के साथ छोटे पौधे भी लगाए जाते हैं, जो बहुत जल्द विकसित होते हैं। जंगल उगाने की यह तकनीक जापान से निकली है। मियावाकी विधि वन रोपण की एक विधि है जिसका उपयोग कम समय में घने जंगल बनाने के लिए किया जाता है। इसे दिवंगत जापानी वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर अकीरा मियावाकी ने विकसित किया गया था। 1970 के दशक से शुरू करते हुए प्रोफेसर मियावाकी ने प्राकृतिक वनों के मूल्य और उन्हें बहाल करने की तत्काल आवश्यकता की वकालत की। इसी पद्धति के तहत ग्राम पंचायत में सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च करके पौधरोपण कराया। जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यह महज कागजों पर ही सीमित रह गया।
पौधे अगर जानवर खा गए तो यह गंभीर विषय
वृक्षारोपण के नाम पर पौधे लगाए गए हैं। यह मियावाकी तकनीक से लगाए गए थे। यह पौधे अगर जानवर खा गए हैं तो यह गंभीर विषय है। संबंधित सचिव को निर्देशित कर पौधरोपण कराएंगे।
- राजेश तिवारी, बीडीओ मछरेहटा