नोटबंदी के 50 दिन बाद भले ही जिला मुख्यालय की बैंकों की हालत में सुधार हुआ है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की बैंकों की हालत जस की तस है। गुरुवार को तंबौर क्षेत्र के रेहार में इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक से कैश न मिलने पर ग्रामीण भड़क गए।
उन्होंने तंबौर-लहरपुर मार्ग जाम कर दिया और करीब करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया। बैंक मैनेजर की खुशामद के बाद भीड़ शांत हुई। ग्रामीणों का कहना है कि बीते आठ दिनों से बैंक से भुगतान नहीं हो रहा है। वहीं, बैंक मैनेजर का कहना है कि मुख्यालय से ही कैश नहीं भेजा गया, इसकी वजह से खाताधारकों को भुगतान नहीं कर पा रहे हैं।
गुरुवार को कड़ाके की ठंड के बीच लोग कैश लेने के लिए बैंक पहुंचे। तंबौर के रेहार में इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के सामने भी ग्रामीण लाइन में खड़े हो गए। इसी बीच बैंक मैनेजर धर्म सिंह ने बताया कि कैश नहीं है, इसलिए भुगतान नहीं हो सकता। इतना सुनते ही लोग भड़क गए और प्रदर्शन करते हुए सड़क पर आ गए।
भीड़ ने लहरपुर-तंबौर मार्ग जामकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। खाताधारकों का आरोप है कि बीते आठ दिनों से खाताधारकों को भुगतान नहीं हो रहा है। बैंक अपना ही पैसा नहीं दे रही हैं। वहीं, प्रदर्शन की सूचना मिलते ही तंबौर पुलिस मौके पर पहुंच गई।
पुलिस ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण मानने को तैयार नहीं थे। इसी बीच मैनेजर ने लोगों को आश्वासन दिया कि वे शुक्रवार को कैश मंगाकर भुगतान करेंगे। इस पर भीड़ शांत हो गई। इस दौरान करीब एक घंटे तक लहरपुर-तंबौर मार्ग पर जाम लगा रहा।
बैंक मैनेजर धर्म सिंह का कहना है कि बीते एक सप्ताह से कैश नहीं आया है। इससे वे खाताधारकों को भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, बिसवां, महमूदाबाद, सिधौली, मिश्रिख, महोली, हरगांव क्षेत्र की बैंकों में भी कैश का संकट रहा।
नोटबंदी के बाद बैंक तो पटरी पर आते दिख रहे हैं पर एटीएम अब तक बेपटरी ही हैं। गुरुवार को 102 एटीएम से सिर्फ एक एटीएम ही जिला मुख्यालय पर चलता नजर आया। अभी तक आधे एटीएम भी नहीं चल सके हैं। लोग रुपये निकालने के लिए बैंक और एटीएम के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।