सीतापुर। लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में भगवा परचम फराने वाली सत्तारूढ़ भाजपा पार्टी का जादू पंचायत चुनाव में नहीं चल सका। पंचायत चुनाव को मिशन 2022 का सेमीफाइनल मानकर चल रही भाजपा को धीरे से जोर का झटका लगा है। जिले में पंचायत चुनाव के अब तक सामने आए संभावित नतीजों में भाजपा, सपा व बसपा में त्रिकोणीय लड़ाई बनती नजर आ रही है।
वहीं निर्दलीय अपनी ताकत दिखकर सब पर भारी पड़े। जबकि जिले में लंबे समय से आईसीयू में रह रही कांग्रेस एक बार फिर कोमा से नहीं उबर पाई है। हालात ये रही कि कांग्रेस पार्टी का जिले में का खाता तक नहीं खुल सका। कम्युनिस्ट पार्टी ने एक सीट पर जीत दर्ज कर लाल सलाम को जिंदा रखा। आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल आदि का भी करिश्मा नहीं चला।
अबकी पंचायत चुनाव के संग्राम में राजनीतिक दलों ने दांव लगाया था। सत्ताई दल सहित कांग्रेस, सपा, बसपा आदि पार्टियों ने जिला पंचायत की सभी 79 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए पार्टियों ने कोशिश भी खूब की थी। भाजपा ने तो राज्य सभा सदस्य हरिद्वार दुबे को जिले का प्रभारी भी बनाया था। कोरोना महामारी के बावजूद जनसभाएं हुई थीं और नुक्कड़ बैठक कर मतदताओं को रिझाने का प्रयास किया गया था। वार्ड वार कार्यकर्ताओं की टोलियां बनाकर सरकार की योजनाओं का डोर टू डोर बखान कराया गया था।
सत्ता पाने की लालसा में सपा, बसपा, कांग्रेस ने भी कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी थी, लेकिन पंचायत चुनाव के बाद अभी तक के आए नतीजे इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि, गवईं राजनीति में दलों को खास फायदा नहीं हुआ। जनता ने व्यक्गित सम्बंधो को तरजीह देते हुए दलीय राजनीति को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। ऐसे में पार्टियों की दाल कम गली और निर्दलीय उम्मीदवार ज्यादा सफल हुए। मंगलवार देर रात तक 61 सीटों के संभावित परिणाम आ चुके थे। इसमें 30 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों का परचम लहराया।
13 सीट सत्ताई दल यानी भाजपा के खाते में जाती दिखाई दे रही थी। 10 पर साइकिल दौड़ी थी। 7 पर बसपा का हाथी चिंघाड़ रहा था। कांग्रेस की झोली खाली थी। हरगांव क्षेत्र की एक सीट पर कम्यूनिस्ट पार्टी ने जीत दर्ज की थी। इसके अलावा अन्य सीटों की मतगणना पूरी नहीं हो पाई थी। उधर सियासी गलियारों में सरगर्मियां तेज हो गई थीं।
भाजपा जिलाध्यक्ष अचिन मेहरोत्रा सहित पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों का काफिला क्षेत्र भ्रमण को निकल गया था। सपा के नेतओं में भी गोटियां बिछाने को मंथन चलने लगा था। सभी दल निर्दलीय जीत दर्ज कराने वाले जिला पंचायत सदस्यों को लेकर गुणा भाग लगाने में जुटे गए हैं।
नहीं चला बड़े नेताओं का जादू
पंचायत चुनाव में कांग्रेस ने जी जान लगा दी थी। स्थानीय नेताओं के साथ ही बड़े नेताओं ने भी प्रत्याशियों के समर्थन में सभाएं की थीं। इसके बावजूद 65 सीटों के जारी संभावित परिणाम में कांग्रेस के हाथ निराशा ही लगी। एक भी सीट पर पार्टी का उम्मीदवार विजयी नहीं हुआ। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि जनता ने कांग्रेस को पूरी तरह से नकार दिया है।
पंचायत चुनाव में पार्टी की खराब दशा से नेताओं व कार्यकर्ताओं के चेहरे मुरझा गए हैं। जनकारों की माने तो पार्टी शुरुआत में गंभीर नहीं रही। टिकट बटवारे में जल्दबाजी की गई। इसी का नतीजा रहा कि बाद में कड़ी मेहनत करने के बावजूद कोई सफलता नहीं मिली।
जिला पंचायत सदस्यों की सीटों के परिणाम आने में अभी समय है। कई ब्लॉकों में मतगणना कर्मी बीमार हो गए हैं। एसिम्टोमैटिक आने के बाद उन्हें ब्लॉकों से हटाकर दूसरे कर्मचारियों को लगाकर काम लिया जा रहा है। संबंधित आरओ और सीडीओ अभी तक जानकारी दे सकते हैं, लेकिन अभी पुख्ता जानकारी मेरे हिसाब से सीडीओ के पास भी नहीं होगी। मंगलवार की देर रात या फिर बुधवार को दोपहर तक ही सभी परिणाम सामने आ सकेंगे। इसके बाद विजयी डीडीसी प्रत्याशियों को प्रमाण पत्र बांटे जाएंगे।
विशाल भारद्वाज, डीएम
30 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते
13 सीटों पर भाजपा जीती
10 सीटें सपा के खाते में गईं
07 सीटें बसपा की झोली में गई
01 सीट पर भाकपा जीती