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सर्वेक्षण कर तैयार किए जाएंगे स्वामित्व संबंधी अभिलेख

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सीतापुर। नवीनतम ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग से ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर उनके स्वामित्व संबंधी अभिलेख तैयार करने के लिए स्वामित्व योजना का सफल क्रियान्वयन किया जाएगा। पांच गांवों को चिह्नित कर पायलट सर्वे की कार्रवाई 15 अगस्त तक पूर्ण करते हुए स्वामित्व संबंधी प्रमाणपत्र पट्टा वितरित किया जाएगा।
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एडीएम विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में बुधवार को कलक्ट्रेट में बैठक हुई। इसमें उन्होंने स्वामित्व योजना व उसके परिक्षेत्र के संबंध में व्यापक चर्चा करते हुए बताया कि ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों का सीमांकन पंचायतीराज विभाग, राजस्व विभाग, भारतीय सर्वेक्षण विभाग के सहयोग से ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक का प्रयोग करते हुए किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि योजना का उद्देश्य नागरिकों को ऋण और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए अपनी संपत्ति को एक वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में प्रयोग करने में सक्षम बनाते हुए वित्तीय स्थिरता प्रदान करना तथा ग्रामीण नियोजन के लिए सटीक भूमि अभिलेखों का निर्धारण करने के साथ-साथ संपत्ति संबंधी विवादों और कानूनी मामलों को कम करना है। इस प्रकार सर्वेक्षण की अवसंरचना और जीआईएस नक्शों का निर्माण किया जायेगा। जिसका उपयोग किसी भी विभाग द्वारा किया जा सकेगा। जीआईएस मानचित्रों का उपयोग करते हुए बेहतर गुणवत्ता वाली ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार की जा सकेगी।
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उन्होंने कहा कि सर्वे का कार्य जितनी अधिक शुद्धता से किया जायेगा। आगे के स्तर पर की जाने वाली कार्रवाइयां भी सकुशल संपन्न हो सकेंगी। अपर जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद स्तर पर पांच गांवों को चिह्नित कर पायलट सर्वे की कार्रवाई 15 अगस्त तक पूर्ण करते हुए स्वामित्व संबंधी प्रमाणपत्र पट्टा वितरित किया जाए। मीटिंग में सभी उपजिलाधिकारी, जिला विकास अधिकारी राकेश कुमार पांडेय, जिला पंचायतराज अधिकारी मनोज कुमार, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट शिशिर कुमार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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