कैश की किल्लत से अब लोगों की जान पर बन आ रही है। हरगांव में इलाज के लिए पिछले कई दिनाें से बैंक के चक्कर लगा रहे एक बीमार व्यक्ति की बुधवार रात मौत हो गई। उधर, घटना से आक्रोशित परिवार ने शव को बैंक के सामने रख कर हंगामा किया।
प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों के समझाने के बाद परिवार शव के अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। जिले में नोटबंदी की वजह से यह चौथी मौत है। इससे पहले तीन और लोगों की जान जा चुकी है। दूसरी तरफ कैश न मिलने से नाराज ग्रामीणों ने महराज नगर बैंक के सामने प्रदर्शन किया।
हरगांव थाना क्षेत्र के ग्राम नमुआपुर कटेसर निवासी वीरेंद्र (38) सांस की बीमारी से परेशान था। बुधवार रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिवार के सदस्य इलाज की खातिर उसे लेकर लखीमपुर जिले की तरफ भागे लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद परिवार के सदस्यों ने गुरुवार सुबह 11 बजे मुद्रासन स्थित इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया। परिवार का कहना था कि वीरेंद्र का खाता इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में है। वह बीमार चल रहा था, इलाज के लिए उसे रुपयों की जरूरत थी।
वह बैंक गया, लाइन में लगा, लेकिन कैश का रोना रोकर बैंक अधिकारियों ने उसे रुपये देने से इन्कार कर दिया। बुधवार देर रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। लखीमपुर जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिवार का कहना है कि बैंक से कैश न मिलने की वजह से समय वीरेंद्र का समय से इलाज नहीं हो सका।
नतीजतन इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई। परिवार बैंक कर्मियों पर कार्रवाई व मुआवजे की मांग कर रहा था। सूचना मिलते ही एसडीएम लहरपुर रतीराम, सीओ राजकुमार शुक्ला, थानाध्यक्ष हरगांव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिवार को मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद परिवार शांत हुआ। करीब दो घंटे तक चले हंगामे से बैंक का कामकाज बाधित रहा।
उधर, महराज नगर इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में भी हंगामा होता रहा। क्षेत्र के तमाम खाता धारक बैंक में रुपये निकालने पहुंचे। यहां पर बैक मैनेजर ओम प्रकाश यादव ने कहा कि सभी अपनी पासबुक जमा कर दो।
इसके बाद अगले दिन कैश का भुगतान किया जाएगा। यह सुनते ही खाता धारक भड़क गए। उन्होंने बैंक के सामने प्रदर्शन शुरू कर दिया। मौके पर पहुंचे पुलिस बल ने भी ग्रामीणों को शांत कराया। इस दौरान एक घंटे तक बैंक के सामने हंगामा होता रहा।
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वीरेंद्र के खाते में हैं सवा लाख रुपये
जिस वीरेंद्र ने बुधवार रात इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। उसके खाते में करीब सवा लाख रुपये मौजूद थे। वीरेंद्र की पत्नी प्रेमा देवी की माने तो वीरेंद्र के खाते में करीब सवा लाख रुपये हैं। इतने रुपये इलाज के लिए काफी थे। वीरेंद्र बैंक जाता रहा, लाइन में लगता रहा, लेकिन बैंक से उसे उसके ही खाते में मौजूद रुपयों से भुगतान नहीं किया गया। नतीजा वीरेंद्र लाइन में लगने के कारण और बीमार होता चला गया। बैंक से रुपये न निकलने की वजह से वीरेंद्र का इलाज नही कराया जा सका। समय से इलाज न मिलने की वजह से उसकी मौत हो गई। इधर बैंक के अधिकारियों का कहना है कि बैंक में कैश ही मौजूद नहीं था, तब वे आखिर भुगतान कैसे कर देते। हालांकि मौत और हंगामे के बाद बैंक खाता धारकों को दो हजार रुपये व अधिक जरूरतमंद को 4 हजार रुपये भुगतान करने लगी। प्रदर्शन के बाद इतनी जल्दी बैंक में भुगतान के लिए रकम कहां से आ गई, यह बात क्षेत्र में चर्चा का विषय है।
कैसे होगी परिवार की परवरिश
वीरेंद्र की मौत के बाद उसकी पत्नी प्रेमा देवी बेहद चिंतित है। वह जितना अपने पति की मौत को लेकर दुखी थी, उससे कहीं अधिक अपने बच्चों की परवरिश व जिम्मेदारियों को लेकर चिंतित थी। वीरेंद्र के परिवार में पत्नी प्रेमा देवी के अलावा पुत्री किरन (18), क्षमा देवी (15), शिवानी (12), मधु (10) व सनी (4) है। पत्नी का कहना है कि एक पुत्री विवाह योग्य है, ऐसे में उसकी समझ में नहीं आ रहा है कि वह कैसे बच्चों की परवरिश करेगी।