सीतापुर। जिले में भीषण गर्मी और उमस के बीच जिला अस्पताल की बदहाली मरीजों पर भारी पड़ रही है। अस्पताल के सबसे बड़े मेडिकल बी वार्ड में सुविधाओं के अभाव के चलते मरीज और उनके तीमारदार विवश हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि अस्पताल प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो मरीजों को जान बचाने के लिए घर से निजी पंखे मंगवाने पड़ रहे हैं।
मेडिकल बी वार्ड में कुल 50 बेड हैं, जो इस समय मरीजों से पूरी तरह फुल हैं। यहां की सबसे बड़ी समस्या वेंटिलेशन और पंखों की कमी है। वार्ड में दो बेड के बीच केवल एक पंखा लगाया गया है, जिसकी हवा किसी भी मरीज तक सही ढंग से नहीं पहुंच पाती। वार्ड में न तो कूलर की व्यवस्था है और न ही एसी की। तीमारदारों का कहना है कि उमस इतनी अधिक है कि स्वस्थ व्यक्ति भी वहां पांच मिनट खड़ा नहीं रह सकता, ऐसे में गंभीर मरीजों का दम फूल रहा है।
तीमारदारों का छलका दर्द
उमेश ने बताया कि उनकी मां तीन दिनों से यहां भर्ती हैं। दिन-रात गर्मी से उनकी हालत बिगड़ रही है। वहीं, आशीष ने बताया कि उसका भाई भर्ती है, लेकिन वार्ड में गर्मी बर्दाश्त से बाहर होने पर उसे मजबूरी में घर से पंखा लाना पड़ा। कई अन्य बेडों पर भी गंभीर स्थिति देखने को मिल रही है, जहां मरीज के सिरहाने निजी पंखे चल रहे हैं।
खराब पंखों ने बढ़ाई मुसीबत
व्यवस्था पर सवाल तब और गहरे हो जाते हैं जब पता चलता है कि वार्ड के दो पंखे पहले से ही खराब पड़े हैं। वार्ड में जगह न होने के कारण नए मरीजों को मजबूरन उन्हीं बेडों पर लेटना पड़ रहा है, जहां पंखे बंद हैं।
प्रशासन का पक्ष
इस मामले पर जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. इंद्र सिंह का कहना है कि पंखों की मरम्मत समय-समय पर कराई जाती है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि यदि पंखे दोबारा खराब हुए हैं, तो शनिवार को ही मिस्त्री बुलाकर उन्हें दुरुस्त करवा दिया जाएगा ताकि मरीजों को राहत मिल सके।