तटीय क्षेत्रों में घाघरा ने कटान तेज कर दी है। रातोंरात तटीय क्षेत्र के चार घर कटकर नदी में समा गए हैं। वहीं नदी खेती योग्य भूमि को अपना निवाला बना रही है। क्षेत्र के करीब 18 गांव कटान की चपेट में हैं, जहां से ग्रामीण पलायन कर रहे हैं। दूसरी तरफ बैराजों से पौने दो लाख क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया है।
बीते एक सप्ताह से घाघरा नदी रेउसा क्षेत्र में कहर बरपा रही थी। क्षेत्र के निर्मलपुरवा, गोडियन पुरवा, सिसैया बाजार, रामलाल पुरवा, कोनी आदि 18 गांव बाढ़ का दंश झेल रहे थे। मंगलवार को नदी का पानी कम होना शुरू हो गया, इससे तटीय क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली। पानी घटते ही नदी ने तटीय क्षेत्र में कटान करना शुरू कर दिया। बुधवार रात गोडियन पुरवा निवासी होली, मुन्ना, राम सागर व राम खेलावन के घर कटकर नदी में समा गए। इन घरों में रहने वाले परिवार नदी का रौद्र रूप देखकर पहले से ही पलायन कर चुके थे। गांव के अन्य घर भी निशाने पर हैं। नदी क्षेत्र के निर्मल पुरवा, कोनी, फौजदार पुरवा, रामलाल पुरवा, पचीसा आदि गांवों में तेजी से कटान कर रही है। भयभीत ग्रामीणों का पलायन गुरुवार को भी जारी रहा। आबादी के अलावा तटीय क्षेत्र की खेती भी कटकर नदी में समाती जा रही है। इससे किसान परेशान हो उठा है। उधर, तीनों बैराज से गुरुवार को 191728 क्यूसेक पानी शारदा व घाघरा नदी में छोड़ा गया।