सीतापुर। शहरवासी अब स्वकर प्रणाली के अनुसार ही टैक्स जाम करेंगे। टैक्स के निर्धारण में नगर पालिका की कोई मनमानी नहीं चलेगी। सर्किल रेट के हिसाब से हर वार्ड का टैक्स तय होगा। लोग मकान का कितना टैक्स बनेगा, इसकी खुद ही गणना कर सकते हैं। इस टैक्स के दायरे में शहर के करीब 25 हजार हाउस होल्ड आएंगे। इनका डाटा ऑनलाइन फीड हो चुका है। नगर पालिका ने स्वकर प्रणाली पर मुहर लगा दिया है। शहर में अधिकतम दो रुपये सर्किल रेट तय किया गया है।
सीतापुर शहर की आबादी करीब दो लाख है। यह आबादी शहर के 30 वार्डों में निवास करती है। शहर में करीब 25 हजार मकान बने हैं। यह सभी मकान टैक्स के दायरे में आ गए है। इन सभी को अब स्वकर प्रणाली के अनुसार ही टैक्स अदा करना होगा। अगर टैक्स निर्धारण की बात की जाए तो अभी तक राजस्व निरीक्षक मौके पर जाकर टैक्स तय कर देते थे। इससे कई बार असमानताएं आती थी। कई बार ऐसी शिकायतें आई। अगर एक व्यक्ति 500 रुपये टैक्स दे रहा है तो उसका पड़ोसी उतनी ही जगह का 1000 हजार रुपये दे रहा है। इससे नगर पालिका में शिकायतों की भरमार लग जाती थी। लोग अपना टैक्स सुधरवाने के लिए नगर पालिका के चक्कर काटते थे।
अब यह सब समस्याएं दूर होने वाली हैं। पूरे शहर के लोगों का एक निर्धारित स्वकर प्रणाली के अनुसार ही टैक्स का निर्धारण हो सकेगा। इसमें किसी की भी मनमानी नहीं चलेगी। यह टैक्स मकान के एरिया, कवर्ड एरिया, रास्ता, नया व पुराना मकान, वार्ड, गली आदि बिंदुओं का आंकलन करके ही तय किया जाएगा। अगर पुराना मकान है तो कम टैक्स पड़ेगा। अगर नया है तो अधिक होगा। अगर वीआईपी कालोनी में रहते हैं तो अधिक टैक्स चुकता करना होगा।
अगर दूरदराज के मोहल्ले में रहते हैं तो टैक्स की अदायगी कम होगी। इससे लोगों को अब नगर पालिका में अपना टैक्स सुधरवाने के लिए भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। नगर पालिका ने बोर्ड बैठक में इस पर अपनी मुहर लगा दी है। अब इस सर्किल रेट का गजट कराकर अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इसका बोझ शहर के करीब 25 हजार मकान स्वामियों पर पड़ेगा। वह इस टैक्स को ऑनलाइन भी चुकता कर सकेंगे।
2018 से चल रही है कवायद
स्वकर प्रणाली शहर में लागू करने को लेकर पिछले तीन बरस से कवायद चल रही है। 2018 में सर्किल रेट के अनुसार स्वकर प्रणाली तय की गई थी। उस समय सभासदों ने अधिक सर्किल रेट होने की बात कहकर बोर्ड बैठक में इसे पास नहीं होने दिया था।
उसके बाद इस पर आपत्तियां मांगी गई थी। इस आपत्तियों के बाद करीब तीन माह पहले बोर्ड बैठक में सहमति बनी थी। एक टीम जिले की आस पड़ोस नगर पालिकाओं में जाकर वहां का अध्ययन करेगी। उसके बाद ही रेट तय किए जाएंगे। इस टीम ने देखा कि बिसवां नगर पालिका का सबसे कम दो रुपये रेट तय है। लेकिन यह नगर पालिका बी श्रेणी में आती है। जबकि सीतापुर ए श्रेणी में आती है। आखिर में बिसवां की तरह दो रुपये अधिकतम सर्किल रेट के हिसाब से रेट तय कर दिए गए है।
ऐसे जाने अपना टैक्स
अगर आप शहर के लालकुर्ती वार्ड में रहते हैं। आपके पास एक हजार वर्ग फुट का मकान है। लालकुर्ती का सर्किल रेट 1.20 रुपये है। आप 30 फुट से अधिक मार्ग पर रहते है। आपका मकान 80 फीसदी कवर्ड है। केवल 20 फीसदी खुला है, ऐसे में आपका टैक्स कुछ इस तरह बनेगा। एक हजार वर्ग फुट गुणे 12 माह गुणे सर्किल रेट (1.20) गुणे कवर्ड एरिया (.80) तो आपका वार्षिक मूल्यांकन 11,520 रुपये आएगा। इस मूल्यांकन का 10 फीसदी हाउस टैक्स व 10 फीसद वॉटर टैक्स बनेगा। यानी 1152 रुपये आपका हाउस टैक्स व 1152 रुपये वॉटर टैक्स होगा।
अलग-अलग मिलेगी छूट
अगर मकान हाल ही में बना है तो आपको सर्किल रेट के अनुसार ही टैक्स अदा करना होगा। अगर आपका मकान 10 से 20 साल पुराना है तो आपको टैक्स में सहूलियत मिलेगी। यह छूट 10 से 25 फीसदी तक मिल सकती है। इसके लिए आपको मकान बनने का पूरा सबूत नगर पालिका को देना होगा। नगर पालिका ने शहर में सभी वार्डों के मकान का सर्वे कर लिया है।
शहर में अब स्वकर प्रणाली के अनुसार ही टैक्स की वसूली की जाएगी। पहले से निर्धारित रेट में कुछ बदलाव किए गए है। अब लोग आसानी से अपने टैक्स का पता लगाकर उसकी अदायगी कर सकेंगे।
- गुरू प्रसाद पांडेय, ईओ