परिषदीय विद्यालयों के नौनिहालों को अब दूध आसानी से मिल सकेगा। कन्वर्जन कास्ट कम होने के कारण दूध वितरण में आ रही दिक्कतों को शासन ने दूर कर दिया है। दूध की कन्वर्जन कास्ट बढ़ा दी गई है।
वहीं दूध की मात्रा प्राइमरी व जूनियर विद्यालयों के लिए अलग-अलग कर दी गई है। प्राथमिक में 200 से घटाकर 150 मिलीलीटर कर दिया गया है। जूनियर के नौनिहालों को पहले की तरह 200 मिलीलीटर दूध मिलता रहेगा।
संशोधित मेन्यू के अनुसार बीईओ को भोजन बनवाने के निर्देश दिए गए हैं। मध्यान्ह भोजन योजना के तहत परिषदीय व मान्यता प्राप्त स्कूलों में ही नौनिहालों को पका पकाया भोजन दिया जाता है।
सप्ताह के प्रत्येक दिन का मेन्यू निर्धारित है। इस मेन्यू के अनुसार ही नौनिहालों को भोजन मिलता है। चालू सत्र में मेन्यू में कुछ परिवर्तन करके दूध को शामिल किया गया था।
रत्येक बुधवार को 200 मिलीलीटर दूध दिए जाने का प्रावधान है। लेकिन कन्वर्जन कास्ट न बढ़ाए जाने से शिक्षकों ने दूध वितरण से हाथ खड़े कर दिए थे।
शिक्षकों का कहना था कि दूध के लिए अलग से बजट मिलना चाहिए। तभी यह संभव है। जुलाई माह में योजना शुरू होने के कुछ ही समय बाद योजना दम तोड़ गई थी।
इस पर शासन ने दूध की कन्वर्जन कास्ट बढ़ाए जाने का फैसला किया है। साथ ही प्राइमरी व जूनियर विद्यालयों में दूध की मात्रा अलग-अलग कर दी है। प्राइमरी के नौनिहालों को अब 200 की जगह 150 मिली लीटर दूध मिलेगा।
वहीं जूनियर के विद्यार्थियों के लिए पहले की तरह 200 मिली लीटर दूध मिलता रहेगा। यह व्यवस्था आगामी बुधवार से लागू होगी।