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जेब से करेंसी, बाजार से ग्राहक गायब

Wed, 09 Nov 2016 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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note - फोटो : अमर उजाला
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देश में पांच सौ व हजार की नोट पर पाबंदी लगने के बाद बुधवार को बाजार में हलचल मच गई। लोगों के पास  हजार और पांच सौ के नोट तो मौजूद हैं, लेकिन उन्हें लेने को कोई तैयार नहीं है।
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हालत यह है कि बाजारों में दुकानें तो खुली हैं पर रोज की तरह बुधवार को अपेक्षा से कम भीड़ उमड़ीं। दोनों करेंसी का संचालन बंद होने से बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा है। पेट्रोल पंपों पर भी पंप कर्मियों और वाहन चालकों के बीच तकरारें होती रहीं।

नर्सिंग होम और मेडिकल स्टोरों पर भी हजार व पांच सौ के नोट स्वीकार नहीं किए गए। संचालकों का कहना था कि पांच या फिर हजार रुपये की पूरी दवाएं खरीदें। इससे लोगों को दिक्कतें उठानी पड़ीं।
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जबकि सरकार ने स्वास्थ्य सेवा, पेट्रोल पंप पर नोट चलने की छूट दे रखी थी। ऐसे में केंद्र सरकार के इस फैसले से छोटे से लेकर बड़ा दुकानदार तक प्रभावित रहा। गल्ला मंडी, आभूषण की दुकानों के अलावा अन्य जगहों पर भी व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ।

ठप रहा गल्ला व्यापार
500 व 1000 की नोट बंद होने से बुधवार को गल्ले का व्यवसाय प्रभावित रहा। किसान धान लेकर मंडी पहुंचा, लेकिन वह धान बेच नहीं सका। वजह ये थी कि आढ़ती 500 रुपये व 1000 रुपये के नोट लेकर बैठे थे, किसान वह नोट लेने को तैयार नहीं था।

जिसकी वजह से गल्ले का व्यवसाय प्रभावित रहा। मंडी में धान से लोड वाहनों की लाइन लगी हुई थी, लेकिन किसान नोटों की वजह से धान बेचने से परहेज कर रहा था। हालत ये थी कि नई करेंसी के लिए किसान एक व दो दिन इंतजार करने को भी तैयार था।

सोने चांदी की मंडी में भी सन्नाटा पसरा
 
500 रुपये व 1000 रुपये के नोट बंद होने से सोने-चांदी का व्यवसाय भी प्रभावित हुआ है। सोने चांदी का व्यवसाय करने वाले प्रशांत गुप्ता कहते हैं कि सुबह से शाम हो गई है, लेकिन एक भी रुपये की दुकानदारी नहीं हुई है।

जो भी ग्राहक आ रहा है, वह 500 और 1000 रुपये की नोट लेकर पहुंच रहा है। जिसकी वजह से आभूषण बेचना मुश्किल हो गया है। नोट की बंदी देखकर लग रहा है कि आने वाले दो तीन दिनों में भी कुछ ऐसा ही हाल रहेगा। इसी तरह से नितिन रस्तोगी, संजय मिश्रा,आलोक कुमार आदि सराफा व्यापारियों का भी हाल था। कुल मिलाकर सराफा दुकानें तो खुली थीं, लेकिन दुकानों पर ग्राहकों का टोटा था।
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