अपर सत्र न्यायाधीश सैय्यद माऊज बिन आसिम ने 16 साल पहले पिसावां के बराहमऊ गांव में विवाद के बाद हुई दो लोगों की हत्या में दोनों पक्षों के चार लोगों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
साथ ही उन पर दस-दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अभियोजन पक्ष की ओर से मुकदमे की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रमाकांत राजवंशी ने की। मामला 10 फरवरी 2001 का है।
बताते हैं कि घर जा रहे इसहाक खां की रंजिश के चलते हत्या कर दी गई थी। मामले में उसके चचेरे भाई शराफत खां ने गांव के ही छुटकन्न खां, लल्ला खां, मुन्ना खां व नाजिर खां के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी दौरान गांव के ही सिराजुद्दीन का भी कत्ल हो गया।
सिराजुद्दीन की हत्या का आरोप इसहाक के पुत्र रियाजुद्दीन पर लगा था। मामले में सिराजुद्दीन के भाई वहाजुद्दीन ने मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचना के बाद पुलिस ने इसहाक की हत्या में नामजद चारों आरोपियों के विरूद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
इसहाक की हत्या के मामले की सुनवाई के दौरान लल्ला खां की मृत्यु हो गई थी। इस पर कोर्ट ने शेष तीन को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जबकि सिराजुद्दीन की हत्या के मामले में रियाजुद्दीन को भी उम्रकैद की सजा दी। चारों दोषियों पर दस-दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।