स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त रखने के मुख्य सचिव ने निर्देश दे रखे हैं। पर सीतापुर अस्पताल में उनका असर नहीं है। संक्रामक रोगों के प्रकोप से परेशान मरीज की भीड़ जिला अस्पताल में तो उमड़ रही है। पर चिकित्सक खोजे नहीं मिल रहे हैं।
अस्पताल में जो चिकित्सक मौजूद भी होते हैं, उनके पास मरीजों से अधिक एमआर मौजूद रहते हैं। ऐसे में डॉक्टरों को दिखाने के लिए घंटों कतारों में मरीज खड़े नजर आते हैं। जिला अस्पताल भवन के पिछले हिस्से में हृदय रोग, फिजीशियन चिकित्सकों की ओपीडी मौजूद है। यहां पर दो फिजीशियन व हृदय रोग के डॉक्टर बैठते हैं।
शनिवार को यहां पर मरीजों की लाइन लगी हुई थी, लेकिन चिकित्सक गायब थे। रामकोट के डिहुआ निवासी राम निवास, बिजवार निवासी बलवीर सिंह, तालगांव के हुसैनवापुर निवासी चिंता हरण, पगरोई निवासी जसवंत, इमलिया सुल्तानपुर के हाजीपुर बेलगवां निवासी सुबेदार खां, महोली के बड़ा गांव निवासी राजेश्वरी देवी, शहर के मोहल्ला श्यामलनाथ निवासी लक्ष्मी देवी बीमार थीं।
इसके बावजूद वे लाइन में लगकर चिकित्सक का इंतजार कर रही थीं। यहां पर करीब 300 मरीज लाइन में खड़े थे, दोपहर 12 बजे का समय हो चुका था, लेकिन न तो फिजीशियन मौजूद थे और न ही हृदय रोग के चिकित्सक। कुछ मरीजों ने बताया कि अभी 20 मिनट पहले ही हृदय रोग विशेषज्ञ अनुपम मिश्रा आए थे, जो करीब 15 मिनट तक मरीजों को देखने के बाद उठकर चले गए।
जिसके बाद से वे लौटकर मरीजों का हाल जानने नही आए हैं। मजबूर होकर कुछ मरीज मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश कुमार के पास पहुंचे। यहां पर डॉक्टर अपने मरीजों के साथ अन्य रोगों के मरीजों को देखने लगे। चिकित्सकों की समझ में नहीं आ रहा था कि वे अपने रोग से संबंधित मरीजों को देखें या फिर हृदय रोगी को दवाएं लिखें।
मुख्य सचिव ने निदेश दिया था कि सीएमओ, सीएमएस स्तर का अधिकारी भी चार घंटे ओपीडी करे, इसलिए सीएमएस की ओपीडी का हाल देखा गया। यहां पर ताला लटक रहा था। कुछ मरीज खड़े थे, जिन्होंने बताया कि करीब नौ बजे ही यहां पर ताला डाल दिया गया था।
हालांकि सीएमएस ने कहा कि उन्होंने आठ से दस बजे तक मरीजों को देखा है। हड्डी रोग व दंत रोग विभाग की हालत इससे भी बुरी थी, इन दोनों चिकित्सकों के पास एमआर मौजूद थे। डॉक्टर मरीजों को देखने के बजाए एमआर से दवाओं के बारे में जानकारी लेने में व्यस्त थे। कुछ लोगों का तर्क था, कि डॉक्टर आखिर क्यों देखें, जब उनके ऊपर के अधिकारी ही कुछ देर में ओपीडी निपटाकर चलते बने, फिर उन पर कौन अंगुली उठा सकेगा।