क्रय केंद्रों पर न तो उनके बैठने के लिए छांव की व्यवस्था है और न ही ठंड से बचने को अलाव तापने के इंतजाम हैं। ऐसे में किसान ठिठुरने को मजबूर हो रहे हैं। सभी केंद्रों पर ऐसे ही हालात बने हुए हैं।
दिसंबर माह में जहां सर्दी बढ़ रही है, वहीं पेराई सीजन भी जोर पकड़ रही है। क्रय केंद्रों पर जमकर भीड़ हो रही है। सुबह से लेकर देर रात्रि तक तौल का क्रम जारी है। लेकिन किसानों को क्रय केंद्रों पर सुविधाएं नहीं मिल रही है। महराज नगर के जीतामऊ सेंटर पर दूरदराज से किसान गन्ना तौलाने आते हैं।
लेकिन उनको न तो बैठने की सुविधा मिलती है, न ही पेयजल की कोई सुविधा है। अगर किसान के गन्ने की तौल दिन में नहीं हो पाती है तो उसे सेंटर पर ही रात्रि गुजारनीे पड़ती है। इन हालातों में अलाव की व्यवस्था न होने से वह वहीं पर ठिठुरते रहते हैं।
ऐसे ही हालात अगरामऊ, सेमरा, सांडा, बंदी, रसूलपुर, सकरन व सरैंया सानी क्रय केंद्रों के भी है। किसानों का कहना है कि सबसे अधिक दिक्कत रात्रि को होती है, वही मवेशियों को भी दिक्कतें होती है। पेयजल के लिए पड़ोस के गांव जाना पड़ता है। सेंटर पर कोई व्यवस्था नहीं है।