पिसावां (सीतापुर)। गंगा-जमुनी विरासत को संजो कर रखने वाली जय मड़ैया बाबा सेवा समिति की रामलीला आज भी अपनी एकता व अनूठे किरदारों के लिए जानी जाती है। यहां की रामलीला सोमवार से कस्बे के बाबू सिंह इंटर कॉलेज के समीप शुरू हो रही है। इसमें करीब 44 वर्षों से निजामुद्दीन अपना विशेष योगदान दे रहे हैं। धर्म की बेड़ियों से दूर निजामुद्दीन पिछले चार दशक से श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान जैसे प्रमुख पात्रों की पोशाक तैयार करते हैं। वह यह काम निशुल्क करते हैं। रामलीला के आयोजन में गांव के कई मुस्लिम युवा भी बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं।
निजामुद्दीन ने बताया कि 1980 से इस सेवा में लगा हूं। हर वर्ष भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान सहित सभी पात्रों की पोशाक को दुरुस्त करता हूं। इस काम से बड़ा सुकून मिलता है। वह बताते हैं कि रामलीला के माध्यम से यह छोटा सा कस्बा बड़ा संदेश देता है। धर्म की सीमाएं तोड़कर प्रेम और सेवा का मार्ग अपनाना ही ईश्वर की सच्ची वंदना है। निजामुद्दीन की सुई से सजे वस्त्र भले ही राम-जानकी के लिए हों, लेकिन ये पूरे समाज को जोड़ते हैं। यहां रामलीला का मंचन स्थानीय कलाकारों द्वारा किया जाता है।
समिति के सदस्य परवेंदर सिंह ने बताया कि यह आयोजन भक्ति और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का माध्यम है। यहां रामलीला दस दिनों तक चलेगी। दशहरे के दिन रावण के पुतला दहन के साथ समापन होगा। क्षेत्र में यह रामलीला सामाजिक एकता का प्रतीक है। रामलीला को देखने के लिए आसपास के कई गांवों से लोग आते हैं। आयोजन में सुरक्षा और स्वच्छता के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। परवेंदर सिंह ने बताया कि धार्मिक बंधनों को तोड़ हिंदू-मुस्लिम सभी मिलकर इस आयोजन को अलग रंग देते हैं।