सीतापुर। सर्द हवा के चलते ही भले ही मौसम का मिजाज ठंडा रहा हो, लेकिन पूर्व विधायक निर्मल वर्मा बुधवार को सपा को छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए। इससे बिसवां में सियासी पारा चढ़ गया है। निर्मल के भाजपा में शामिल होने पर राजनीतिक दलों के जातीय समीकरण बनने और बिगड़ने लगे।
चुनाव से ऐन पहले भाजपा में शामिल निर्मल वर्मा के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो वह 2007 में पहली बार बहुजन समाज पार्टी के टिकट से बिसवां विधानसभा से विधायक बने थे। इसके बाद उन्होंने 2012 के विधानसभा चुनाव में भी बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ कर अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन उन्हें सपा प्रत्याशी रामपाल यादव से हार का मुंह देखना पड़ा था।
2017 के विधानसभा चुनाव में फिर से निर्मल वर्मा बसपा के टिकट पर बिसवां विधानसभा से चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन तब भाजपा प्रत्याशी महेन्द्र यादव से हार गए। इसके बाद वर्ष 2018 में निर्मल वर्मा ने बसपा के हाथी से उतर कर साइकिल पर सवार हो लिए थे। इस बार के विधानसभा चुनाव में बिसवां से सपा का सम्भावित प्रत्याशी माना जा रहा था, लेकिन बुधवार को उनके अचानक सपा को छोड़ कर भाजपा में शामिल होने की खबर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।