सीतापुर। मूकबधिर महिला के नवजात का अपहरण करने के मामले में जिला जज ने आरोपी महिला को सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
लखीमपुर के मैलानी थानाक्षेत्र निवासी गेंदनलाल की मूकबधिर पत्नी नीतू अप्रैल 2011 में सीतापुर के रामकोट थानाक्षेत्र में अपने मायके आई थी। जहां उसने दो अप्रैल 2011 को एक पुत्र को जन्म दिया। दो दिन बाद नीतू के घर पहुंची एनुननिशा निवासी कानपुर दर्शन के बहाने नीतू, उसकी मां विद्या व नवजात को लेकर नैमिषारण्य गई। जहां उसने सबरी आश्रम के निकट विद्या को चक्रतीर्थ का पानी लाने के लिए भेज दिया और नीतू के मूकबधिर होने का फायदा उठाकर नवजात को लेकर वहां से भाग गई।
मामले की शिकायत गेंदनलाल ने तत्कालीन उपजिलाधिकारी मिश्रिख से की थी। इसके बाद पुलिस ने एनुननिशां को बच्चे सहित खोज लिया था। न्यायालय में जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी प्रशांत शुक्ला व शासकीय अधिवक्ता अफान हसन सिददीकी ने साक्ष्यों को प्रस्तुत कर अभियोजन के कथन को साबित किया। इस पर जिला जज कुलदीप कुमार ने आरोपी महिला को सात वर्ष के कारावास व पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
दुष्कर्मी को सात वर्ष का कठोर कारावास
सीतापुर। अपर सत्र न्यायाधीश जितेंद्र हरि ने नाबालिग के अपहरण व बलात्कार के एक मामले में आरोपी को सात वर्ष के कठोर कारावास व 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमे में पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान ने की। अधिवक्ता ने बताया कि हरदोई के अतरौली थानाक्षेत्र में ग्राम लुधौरा निवासी बबलू के खिलाफ संदना थाने में 20 मार्च 2013 को नाबालिग को बहला फुसलाकर ले जाने का मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में पुलिस ने एक महिला सहित चार लोगों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर बबलू को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं शेष आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया है।
हत्यारोपी को आजीवन कारावास
सीतापुर। अपर सत्र न्यायाधीश ने हत्या के एक मामले में आरोपी को आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमे की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मोहम्मद असलम ने की। रामकोट थाना क्षेत्र निवासी अशोक कुमार ने भाई जगदीश की हत्या का मुकदमा पांच अगस्त 2010 को दर्ज कराया था। इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों रामसुचित वर्मा, अखिलेश सक्सेना, दिनेश रैदास व मान सिंह यादव के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। वर्ष 2014 में इस मामले में मान सिंह यादव के अनुपस्थित हो जाने के चलते उसकी पत्रावली पृथक की गई। शेष तीन आरोपियों को वर्ष 2014 में दोषी करार देकर सजा सुना दी गई थी। आरोपी मान सिंह यादव के खिलाफ यह विचारण जारी रहा। इसमें आए साक्ष्य के बाद शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र सिंह ने आरोपी मान सिंह यादव को आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।