मौनी अमावस्या पर शुक्रवार को नैमिषारण्य में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। भक्तों ने चक्रतीर्थ समेत गोमती के तट पर स्नान कर पूजन किया। बाद में श्रद्धालुओं ने मां ललिता देवी मंदिर समेत विभिन्न मंदिर और मठों में जाकर देवी-देवताओं के दर्शन किए और सुख समृद्धि की कामना की।
मौनी अमावस्या के चलते गुरुवार रात से ही श्रद्धालु नैमिषारण्य पहुुंचने लगे। रात 12 बजे श्रद्धालुओं एवं साधकों ने गोमती के जल में विशेष रीति से तैयार आयुर्वेदिक रसायन ब्रह्मी का पान किया।
इस विशेष रसायन के बारे में ऐसा विश्वास किया जाता है कि जो भी व्यक्ति माघ चतुर्दशी की रात 12 बजे पवित्र नदी के जल में स्नान कर धार्मिक परंपरा के अनुसार मां सरस्वती का ध्यान करते हुए ब्रह्मी का पान करता है, माता के आशीर्वाद से उसे विद्या एवं बुद्धि की प्राप्ति होती है।
स्मरण शक्ति तीव्र होती है। इस प्रक्रिया को विशेष विधि से योग्य आचार्यों की सानिध्य में संपन्न कराया गया। श्रद्धालुओं ने आदि गंगा गोमती तट पर पहुंचकर गोमती में डुबकी लगाई और पूजा अर्चना की। इसी तरह से चक्रतीर्थ पर भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु स्नान व पूजन करते नजर आए।
श्रद्धालुओं ने प्रमुख दर्शनीय स्थल माता ललिता देवी मंदिर, कालीपीठ, हनुमान गढ़ी, सूत गद्दी, व्यास गद्दी, देवपुरी, बाला जी मंदिर, देवदेवेश्वर समेत अनेक मंदिरों में माथा टेका एवं सुख समृद्धि की कामना की। पूजा अर्चना का यह क्रम देर शाम तक चलता रहा।
शुक्रवार को मौनी अमावस्या थी, इस वजह से लोग गुरुवार रात से ही नैमिषारण्य तीर्थ पहुंचने लगे थे। इसी बीच देर रात से बारिश होने लगी पर श्रद्धालुओं की आस्था को यह बारिश नहीं डिगा सकी।