आम आदमी की थाली से दाल दूर होती जा रही है। सबसे अधिक असर अरहर की दाल पर पड़ा है। एक पखवारे में अरहर की दाल के रेट में 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
थोक बाजार में अव्वल दाल 190 रुपये व सामान्य श्रेणी की दाल 160 रुपये प्रति किलो में बिक रही है। वहीं खुदरा बाजार में इसकी कीमत 195 तक पहुंच गई है।
कारोबारियों का अनुमान है कि दाल की कीमतें अभी और बढ़ेंगी। इससे आम आदमी को जल्द महंगी दाल से निजात मिलने के आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं। वहीं दामों में आई उछाल से आम लोग दाल से परहेज करने लगे हैं।
इसका असर बिक्री पर भी पड़ा है। दाल व्यापारियों का कहना है जिले में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात आदि प्रांतों से दाल की सप्लाई होती है। इस बार बेमौसम बरसात हुई थी। इसका सबसे ज्यादा असर अरहर की फसल पर पड़ा है।
बारिश से पैदावार में गिरावट दर्ज की गई। यही कारण है अरहर की दाल में अचानक तेजी आ रही है। दो सप्ताह पहले 135 रुपये किलो बिकने वाली अव्वल दाल 190 रुपये में पहुंच गई है। इसी प्रकार सामान्य श्रेणी की दाल 160 रुपये में पहुंच गई।
इसका असर अन्य दालों पर पड़ा है। अरहर दाल की बिक्री पर करीब 50 फीसदी की कमी आ गई है। अरहर की जगह लोग दूसरे दालें उपयोग करने लगे हैं। इसी कारण दूसरे दालें भी महंगी हो रही हैं। जिस हिसाब से बढ़ोतरी हो रही है उससे भाव जल्द कम होने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं।
जब तक नई फसल तैयार होकर नहीं आएगी, भाव पर काबू पाना मुश्किल होगा। इस महंगाई का असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। आम आदमी की थाली का जायका भी बिगड़ा है। बढ़ती महंगाई को लेकर लोगों में नाराजगी है।
एक दिन में होती 90 टन की जरूरत
व्यापारियों के मुताबिक जिले में
एक दिन में 90 टन से अधिक दालों की खपत होती है। ये सभी दालें गैर
प्रांतों से आती हैं। जिले में उत्पादन ठप है। पूरा जिला बाहरी दालों पर ही
निर्भर है। इसी वजह से जब दालें महंगी होती हंै तो इसका व्यापक असर जिले
पर दिखाई देता है।