सीतापुर। चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा मंगलवार से वासंतिक नवरात्र शुरू हो रहे हैं। इस बार मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आएंगी। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के मंदिरों में भक्तों के जयकारे गूंजते रहेंगे। नवरात्र को लेकर मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई है। मंदिरों का रंगरोगन करके उनको सजाए जाने की तैयारी चल रही है।
शहर के सिटी पॉवर हाउस के सामने मां संतोषी मंदिर, आलमनगर का दुर्गा मंदिर, पराग डेरी स्थित मां काली का मंदिर सहित अन्य मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई है। सबसे अधिक भीड़ नैमिषारण्य के मां ललिता देवी मंदिर में लगेगी। आदि शक्ति मां ललिता देवी के पावन दरबार में देश के कोने कोने से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए नवरात्र का आनंद ही कुछ विशेष होता है।
मां ललिता देवी मंदिर के प्रधान पुजारी जगदम्बा प्रसाद ने बताया कि माता का यह पावन शक्तिपीठ पौराणिक मान्यता के अनुसार शक्ति उपासकों के लिए परम फलदाई है। देवी भागवत महापुराण में नैमिषारण्य तीर्थ में लिंगधारिणी मां ललिता देवी के शक्तिपीठ का वर्णन प्राप्त होता है। मां ललिता के दरबार में शारदीय व वासन्तिक दोनों नवरात्रों में धर्म और भक्ति के एक अलग ही रूप के दर्शन होते है।
नैमिष तीर्थ के आचार्य सदानंद द्विवेदी ने बताया कि इस बार वासन्तिक नवरात्र 13 अप्रैल से 21 अप्रैल बुधवार को पूर्ण होंगे। नवरात्र अष्टमी 20 अप्रैल दिन मंगलवार को रहेगी। रामनवमी 21 अप्रैल दिन बुधवार को रहेगी । पारण 22 अप्रैल गुरुवार को सुबह 7 बजे तक करना उत्तम रहेगा।
इस बार अश्व होगी मां की सवारी
नैमिषारण्य (सीतापुर)। पुजारी जगदंबा प्रसाद ने बताया कि नवरात्रि में मां दुर्गा के वाहन का भी विशेष महत्व माना गया है। ऐसा माना जाता है कि मां दुर्गा हर नवरात्रि के प्रथम दिन अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर आती हैं। मां के वाहन से भी सुख समृद्धि का पता लगाया जाता है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि मंगलवार के दिन से शुरु हो रहे हैं।
इसलिए मां की सवारी अश्व यानी घोड़ा मानी जाएगी। शास्त्रों में मां दुर्गा का अश्व पर आना गंभीर माना जाता है। भागवत पुराण के अनुसार नवरात्रि पर मां दुर्गा जब घोड़े की सवारी करते हुए आती हैं तो इसका प्रभाव प्रकृति, देश आदि पर देखने को मिलता है।
ये है घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
घटस्थापना का पहला शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल मंगलवार को सुबह 5 बजकर 28 मिनट से सुबह 8 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। उसके बाद फिर अभिजित महूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक मिल रहा है।
यह है नवरात्रि में कलश घट स्थापना की पूजा विधि
मिट्टी को चौड़े मुंह वाले बर्तन में रखे और उसमें सप्तधान्य बोएं। अब उसके ऊपर कलश में जल भरे और उसके ऊपरी भाग गर्दन में कलावा बांधे। फिर पंचपल्लव या आम के पत्तों को कलश के ऊपर रखे।
कलश में रोली, फूल, सुपारी, दूर्वा, सिक्का डालने के बाद उसके ऊपर पूर्णपात्र चावल से पूरा भर कर रखे। फिर नारियल में कलावा लपेटे। उसके बाद नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर और पत्तों के बीच में रखे। घट स्थापना पूरी होने के मां दुर्गा जी का आवाह्न कर पूजन पाठ के साथ व्रत शुरू करें।
कब, कौन से स्वरूप की होगी पूजा
प्रतिपदा तिथि मां शैल पुत्री की पूजा और घटस्थापना, द्वितीया तिथि मां ब्रह्मचारिणी पूजा, तृतीया तिथि मां चंद्रघंटा पूजा, चतुर्थी तिथि मां कुष्मांडा पूजा, पंचमी तिथि मां स्कंदमाता पूजा, षष्ठी तिथि मां कात्यायनी पूजा, सप्तमी तिथि मां कालरात्रि पूजा, अष्टमी तिथि मां महागौरी, नवमी तिथि मां सिद्धिदात्री और रामनवमी की पूजा होगी।