स्वास्थ्य विभाग परिवार नियोजन के लिए नसबंदी करता है। भरोसा किया जाता है कि नसबंदी के बाद महिला गर्भवती नहीं हो सकती है, लेकिन क्षेत्र में एक महिला नसबंदी के बाद भी गर्भवती हुई, जिसने एक बच्चे को जन्म दिया है।
अब क्षेत्र के लोग नसबंदी प्रक्रिया पर अंगुलियां उठाने लगे हैं। जबकि डॉक्टरों का कहना है कि कई बार नसबंदी फेल हो जाती है। ऐसे में सरकार पीड़ित परिवार को 30 हजार रुपये का मुआवजा देती है।
खैराबाद क्षेत्र के मोहल्ला जमैयतपुर निवासी बबलू की पत्नी माया देवी ने गत 30 नवंबर 2015 को कस्बे के ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी कराई थी। अभी नौ माह पूर्व वह गर्भवती हो गई, जांच कराई तो डॉक्टरों ने इसकी पुष्टि भी कर दी।
गत 26 मार्च को माया देवी ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पुत्र को जन्म दिया है। माया देवी के पति बबलू ने बताया कि पहले से ही उसके तीन पुत्र व एक पुत्री है। जिसकी वजह से उसने पत्नी की नसबंदी कराई थी।
परिवार चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगा रहा है। उधर, डॉक्टरों का कहना है कि कभी कभी नसबंदी केस फेल हो जाते हैं। खैराबाद के चिकित्साधिकारी डॉक्टर देवराज चौधरी का कहना है कि ऐसे केसों में सरकार पीड़ित परिवार को 30 हजार रुपये की आर्थिक मदद देती है।
यह मदद माया देवी के परिवार को उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि बीते 4 वर्षों में करीब 2,400 नसबंदी हुई है। उनमें यह पांचवां केस है, जिसमें नसबंदी फेल हुई है। जबकि बाकी नसबंदी पूरी तरह से कामयाब रहीं हैं।