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दो साल में नकुल की बढ़ गई 50 लाख की अचल सम्पत्ति

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लोकसभा चुनाव में नामांकन करते नकुल दुबे। - फोटो : amar ujala
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सीतापुर। सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी नकुल दुबे ने गुरुवार को अपने समर्थकों संग कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इसमें संलग्न हलफनामे के मुताबिक, उन्होंने दो साल में 50 लाख की अचल सम्पत्ति में इजाफा कर लिया है। हालांकि इस दरम्यान चल सम्पत्ति 17 लाख कम हुई है। एक टोयटा क्वालिस के मालिक हैं। 

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पेशे से अधिवक्ता नकुल दुबे इससे पहले बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। 2014 में लखनऊ से बसपा के सिंबल पर लोकसभा चुनाव लड़े थे। अबकी सीतापुर संसदीय सीट से गठबंधन के प्रत्याशी हैं। गुरुवार को उन्होंने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। जिला लखनऊ के थाना बक्शी का तालाब अंतर्गत भोला पुरवा रुदही गांव के मूल निवासी नकुल दुबे करोड़पति हैं।

 

वर्ष 1984 में विद्यान्त हिन्दू डिग्री कॉलेज लखनऊ से बीए और 1987 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री लेकर इन्होंने लखनऊ हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। राजनीति में रुझान होने से वर्ष 2007 में महोना से बसपा के सिंबल पर विधायक निर्वाचित हुए। फिर बसपा सरकार में इन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। लोकसभा चुनाव 2014 में लखनऊ सीट से मैदान में उतरे थे।
 

उस समय इनके पास 155 लाख की अचल सम्पत्ति तथा 27.87 लाख की चल सम्पत्ति थी। तीन साल बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में इनकी हैसियत में इजाफा हुआ और चल सम्पत्ति 76 लाख 12 हजार जबकि अचल सम्पत्ति भी 180 लाख हो गई। दो साल में 50 लाख की अचल सम्पत्ति का इन्होंने इजाफा किया है।

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नामांकन पत्र में प्रस्तुत ब्यौरे के मुताबिक पैतृक गांव तथा लखनऊ में गैर कृषि भूमि समेत यह करीब 230 लाख की अचल सम्पत्ति की मालिकाना हैसियत रखते हैं। जबकि 58 लाख 33 हजार 638 चल सम्पत्ति के मालिक हैं। इसमें 1 लाख की नकदी उनके पास है और करीब 40 लाख की रकम विभिन्न बैंक खातों में जमा है।

 

इसके अलावा करीब 15 लाख 67 हजार का एफडीआर भी नकुल के पास है। करोड़पति नकुल दुबे सादगी पसंद हैं। लिहाजा, लग्जरी गाड़ियों के काफिले के बजाय इनके पास महज एक टोयटा क्वालिस गाड़ी है।

मड़ियांव थाने में दर्ज है एक केस 
लखनऊ के थाना मड़ियांव में नकुल दुबे के खिलाफ एक केस दर्ज है। यह केस 2017 विधानसभा चुनाव में नामांकन के दौरान जुलूस के कारण रोड जाम होने के आरोप में दर्ज किया गया था। 

पांच साल में 55 लाख की कमाई
पूर्व मंत्री व गठबंधन प्रत्याशी नकुल दुबे ने पिछले पांच साल में करीब 55 लाख 53 हजार 848 रुपये की कमाई की है। इनके आय के स्रोत वकालत का पेशा और पूर्व विधानसभा सदस्य की पेंशन है। 

धर्मपत्नी ममता भी लखपति
नकुल दुबे की पत्नी ममता दुबे भी लखपति हैं। ममता के पास करीब 46 लाख 87 हजार 137 रुपये की चल सम्पत्ति है। इसमें 50 हजार रुपये नकद तथा 6 लाख 25 हजार 199 रुपये विभिन्न बैंक खातों में हैं। करीब साढ़े छह लाख कीमत का 20 तोला सोना और 30 लाख कीमत का एक मकान इनके पास है। करीब 18 लाख का एफडीआर भी है। इनकी आय का स्रोत वकालत है। 

बड़ी बेटी के पास 7 लाख और छोटी के पास 17 हजार की सम्पत्ति
नकुल दुबे की दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी सिद्धि दुबे के पास 7 लाख 27 हजार 633 रुपये की चल सम्पत्ति है। इसमें 15 हजार रुपये नकद 12633 रुपये बैंक खाते में तथा 7 लाख की एफडीआर है। छोटी बेटी समृद्धि दुबे के पास 17 हजार 666 रुपये की चल सम्पत्ति है। इसमें 10 हजार नगद 7666 रुपये बैंक खाते में हैं। बेटियों की आय का अभी कोई स्रोत नही है। 

अनदेखी से रालोद प्रदेश महासचिव खफा
महागठबंधन में सपा-बसपा के अलावा रालोद भी शामिल है। इस लिहाज से रालोद को साथ लेकर चलना गठबंधन प्रत्याशी का फर्ज है। जबकि सीतापुर गठबंधन प्रत्याशी नकुल दुबे रालोद की लगातार अनदेखी करते आ रहे हैं। यह आरोप रालोद प्रदेश महासचिव आरपी सिंह चौहान ने जारी एक बयान में जड़ा है। बताया कि नामांकन में भी उनकी पार्टी की अनदेखी की गई। जिलाध्यक्ष तक को नही बुलाया गया। इस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए हाईकमान को सूचना देेने की बात कही है। 

डीएम के आदेश को नहीं मानते एडीएम
एडीएम विनय पाठक जिलाधिकारी के आदेश को तवज्जो नहीं देते है। इसका उदाहरण गुरुवार को नामांकन प्रक्रिया के दौरान देखने को मिला। पत्रकारों ने जिलाधिकारी से प्रत्याशी का नामांकन दाखिल करते समय फोटो करने की बात कही। जिलाधिकारी अखिलेश तिवारी ने हामी भरते हुए फोटो लेने के लिए हां कर दी। जब पत्रकार कमरे के अंदर जाने लगे तो एडीएम ने पत्रकारों को रोक लिया।

अंदर नहीं जाने दिया। पत्रकारों ने जिलाधिकारी से अनुमति मिलने की बात कही तब भी वह नहीं माने और कहा कि जिलाधिकारी का ही आदेश है अंदर कोई न आए। इसके बाद पत्रकारों ने जिलाधिकारी को फोन किया तो उन्होंने कहा कि मैैंने तो अंदर आने को बोल दिया है। आखिर कौन रोक रहा है। उसके बाद पत्रकारों को अंदर बुलाया गया। एडीएम की यह कार्यशैली खासी चर्चा का विषय रही।

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