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Sitapur News: या हुसैन की सदाओं के बीच अजादारों ने किया मातम

Fri, 26 Jun 2026 11:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
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लहरपुर में निकलता ताजिये का जुलूस व महमूदाबाद में दुलदुल के साथ निकले अजादार। संवाद
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सीतापुर। मुहर्रम की दसवीं तारीख को जिलेभर में या हुसैन, या हुसैन.. की सदाओं के बीच ताजिये लेकर जुलूस निकाले गए। गम में डूबे अजादारों ने मातम करते हुए इमाम हुसैन और उनके परिवार की शहादत को याद किया। शहर में अंगारों पर चलकर आग का मातम किया गया। खैराबाद, लहरपुर व महमूदाबाद समेत कई जगह छुरी व तलवार का मातम किया गया। पुलिस की चाक-चौबंद सुरक्षा के बीच देर शाम गमगीन माहौल में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
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शहर के पुराने इलाके में बृहस्पतिवार रात नौ बजे हाजी साहब के इमामबाड़े से जुलूस उठा। अपने कदीमी रास्तों से होते हुए जुलूस बड़े इमामबाड़े पहुंचा। वहां रात 12 बजे अंजुमनों के अजादारों ने अंगारों पर चलकर आग का मातम किया। देर रात तक जियारत का सिलसिला चलता रहा। दसवीं मुहर्रम पर शुक्रवार को हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 जानिसारों की याद में कजियारा स्थित बड़े इमामबाड़े से जुलूस-ए-अलम निकाला गया। जिसमें बड़ी संख्या में अजादारों ने या हुसैन की सदाएं बुलंद करते हुए मातम किया। जुलूस अपने निर्धारित रास्ते से होता हुआ कोट कर्बला पहुंचा, जहां देर शाम गमगीन माहौल में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
लहरपुर में सुबह से ही मजलिसों व मातम का सिलसिला शुरू हो गया था। नगर के चिक्की टोला में मजलिस का आयोजन किया गया। इसके बाद मस्जिद कदमे रसूल काजी टोला में आशूरा के आमाल हुए। फिर इमामबाड़ा सरकारे हुसैनी से जुलूस उठा, जिसमें मौलाना मिर्जा अफरोज अहमद नजफी ने कहा कि इमाम हुसैन का सबसे बड़ा संदेश यह था कि चाहे अत्याचारी कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसके सामने सिर नहीं झुकाना चाहिए। कर्बला का संघर्ष सत्ता या जमीन के लिए नहीं था बल्कि इंसानी मूल्यों, सच्चाई और इंसाफ को बचाने के लिए था। जुलूस में छुरी और तलवार का मातम भी हुआ।
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अंजुमन लश्करे हुसैनी ने नौहे पढ़े। दरियापुर में आग का मातम किया गया। अंजुमन लश्करे हुसैनी मातम करते हुए कर्बला जोशी टोला गई, जहां ताजियों को दफन किया गया। खैराबाद नगर में इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए अकीदतमंदों ने दसवीं मुहर्रम का मातम मनाया। शिया समुदाय के कोनैन, आगा मेहंदी, जवाद, आलम, ताजवर, ताबिश, सनी, अली, उमाम, हैदर आदि ने जंजीरों व छुरी से मातम किया। कर्बला के मैदान में ताजियों को दफन किया गया।
इसके अलावा सुन्नी समुदाय के लोगों ने नगर के कलंदर ताजिया, काला ताजिया, मोती का ताजिया, कमालसरांय का ताजिया कर्बला के मैदान में सुपुर्द-ए-खाक किए। महमूदाबाद किला से दसवीं मुहर्रम का जुलूस सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह 11 बजे शाही माही मरातिब के साथ शबील, ऊंट, अब्बासी अलम, दुलदुल, शबीहे ताबूत व ताजियों के साथ निकला। जुलूस कदीमी रास्तों से होता हुआ दरगाह पहुंचा। जुलूस में लोग नौहाख्वानी व दर्जनों युवा मातम कर रहे थे। महिलाएं व बच्चे नंगे पैर जुलूस में शामिल थे। कर्बला में प्रोफेसर अली खान, डाॅ. अम्मार रिजवी, आरिफ रिजवी, हारून रिजवी, अनवार हुसैन, बहादर अब्बास आदि ने नम आखों ने ताजिये दफन किए। इससे पहले नवीं मुहर्रम को ताजिये चबूतरे पर आने के बाद से तमाम महिला व पुरुषों ने इमाम हुसैन की याद में चौकी भरी। घरों में फातिया व मजलिसों का दौर चलता रहा। किले के अलावा मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट सहित क्षेत्र में बड़े-बड़े ताजिये रखे गए। एडीएम आयुष चौधरी, एएसपी दुर्गेश सिंह, एसडीएम डॉ. अंजलि सिंह, सीओ वेद प्रकाश श्रीवास्तव पुलिस बल के साथ मुस्तैद रहे।


आज सुपुर्द-ए-खाक होगा बावन डंडे का ताजिया
खैराबाद का प्रसिद्ध बावन डंडे का ताजिया शुक्रवार को रौजा दरवाजा युसूफ खान की दरगाह से बाहरी चौक पर लाया गया। जहां हजारों लोगों ने फूल-माला, खुटिया, शरबत आदि चढ़ाकर मन्नत मांगी। हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक बावन डंडे के ताजिया का दीदार करने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से लोग पहुंच रहे हैं। ताजिया कमेटी के अध्यक्ष जावेद मुस्तफा ने बताया कि ताजिया देर शाम उठकर पुरानी बाजार से मिठाई वाली गली, पोस्ट ऑफिस मार्ग से दादा मियां के दरगाह के निकट चौक पर रखकर रात्रि में विश्राम करेगा। शनिवार को भ्रमण करते हुए देर शाम कर्बला पहुंचेगा। कर्बला के मैदान में हजारों की भीड़ के सामने दूध से भरे हौदा में ताजिया सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

लहरपुर में निकलता ताजिये का जुलूस व महमूदाबाद में दुलदुल के साथ निकले अजादार। संवाद

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