सूबे में गुरुवार से पॉलीथिन के कैरी बैग इस्तेमाल पर भले ही रोक लग गई हो मगर सीतापुर में यह प्रतिबंध पहले दिन ही बेअसर रहा। कारण यह है कि इसकी रोकथाम के लिए जिम्मेदार कड़ाके की ठंड में सुस्त दिखे। पहले दिन यह अभियान फुस्स हो गया। समूचे जिले में न तो टीमें बनीं और न ही कहीं भी छापेमारी हो सकी।
अभियान का नतीजा सिफर ही रहा। ऐसे में हर जगह पर पॉलीथिन का धड़ल्ले से इस्तेमाल होता रहा। व्यापारी व ग्राहक आराम से पॉलीथिन का उपयोग करते देखे गए। बड़े प्रतिष्ठानों से लेकर छोटे व्यापारी पॉलीथिन में ही सामान पैक करके ग्राहकों को दे रहे हैं। उनके पास पॉलीथिन के अलावा अन्य कोई दूसरा विकल्प भी नहीं दिखा।
वह खुले में धड़ल्ले से इसका उपयोग कर रहे हैं। जब व्यापारियों से प्रतिबंध के बारे में पूछा गया तो कुछ ने इससे अनभिज्ञतता जताई, तो कुछ ने प्रशासन पर ही आरोप मढ़ दिया। व्यापारियों का कहना है प्रशासन को इसके लिए जागरूकता अभियान चलाना चाहिए था। फायदे व नुकसान बताना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
जब बाजार में पॉलीथिन बिक रही है तो उसका उपयोग करेंगे। अगर प्रतिबंध है तो पहले प्रोडक्शन को बंद करना चाहिए। तभी इसका फायदा मिलेगा। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल का कहना है पॉलीथिन पर प्रतिबंध एक सराहनीय कदम है। संगठन इसमें पूरी मदद करेगा। लेकिन पॉलीथिन प्रतिबंध की नीति स्पष्ट नहीं है।
प्रदेश महामंत्री शोभित टंडन ने डीएम को ज्ञापन देकर कहा प्लास्टिक कारोबार करने वाले व्यापारियों के समक्ष ऊहापोह की स्थिति उत्पन्न हो गई है। स्पष्ट नीति न होने के कारण व्यापारी परेशान हैं।
उन्हाेंने डीएम से इस बारे में स्पष्ट जानकारी देने की गुहार लगाई। साथ ही कहा इसे व्यवस्थित करने से पहले व्यापारियों को एक सप्ताह का समय दिया जाए।