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मौनी अमावस्या : एक लाख श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

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नैमिषारण्य में मौनी अमावस्या पर चक्रतीर्थ में स्नान करते श्रद्घालु। - फोटो : SITAPUR
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नैमिषारण्य (सीतापुर)। कोरोना के खौफ के बाद गुरुवार को मौनी अमावस्या पर पहली बार ऋषि-मुनियों की पावन धरा पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। चक्रतीर्थ से लेकर पवित्र नदियों और घाटों पर काफी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। सभी ने पुण्य की डुबकी लगाकर मोक्ष की कामना की। स्नाना के बाद विधि विधान से पूजन अर्चन कर पितरों की आत्मा की शांति के लिए नदियों में तर्पण किया। ये सिललिसा आधी रात से गुरुवार को पूरे दिन चलता रहा। आस्था का रेला कई महीनों के बाद उमड़ने से लोगों को सुखद माहौल का एहसास भी हुआ।
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नैमिषारण्य के स्थानीय लोगों की माने तो मार्च 2020 में फाल्गुन अमावस्या पर श्रद्धालुओं का हुजूम उड़ा था, लेकिन इसके बाद कोरोना संक्रमण के तेजी से फैलने की वजह लॉकडाडन लग गया था। इसके बाद से तो सभी धार्मिक गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लग गई थी। मंदिरों के कपाट तक बंद करा दिए गए थे। चक्रतीर्थ से लेकर पवित्र नदियों में स्नान वर्जित कर हो गया था, लेकिन कोरोना संक्रमण अब खात्मे की ओर है। लोगों की जिंदगी भी अब पटरी पर लौट चुकी है।
ऐसे में गुरुवार को माघ माह की मौनी अमावस्या पर चक्रतीर्थ और पवित्र नदियों में स्नान करने की छूट प्रशासन ने दी, फिर क्या था नैमिष की पावन तपोभूमि पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। शुभ और ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर पुण्य के भागीदार बनने के लिए एक दिन पहले ही महिलाओं, पुरुषों, बच्चों का आना शुरू हो गया था। बताते हैं कि 10 फरवरी की रात 1:36 बजते ही जैसे अमावस्या का मुहूर्त शुरू हुआ लोग चक्रतीर्थ और पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाने चल पड़े।
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श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए घाटों पर पहुंचे और स्नान आदि कर मोक्ष की कामना की। चक्रतीर्थ से लेकर नैमिष के घाटों, पवित्र नदियों में स्नान करने का सिलसिला गुरुवार को दोपहर बाद तक चला। पावन संयोग पर श्रद्धालुुुओं ने आदि गंगा गोमती, चक्र तीर्थ में आचमन किया। इसके बाद तीर्थ पुरोहितों को यथाशक्ति अन्नदान व दक्षिणा देकर उनका आशीष लिया। करीब दस माह बाद उमड़े आस्था के सैलाब के बीच करीब एक लाख लोगों ने डुबकी लगाई है।
पिंड दान कर पितरों को किया प्रसन्न
इस दिन श्रवण नक्षत्र में चंद्रमा और छह ग्रह मकर राशि में होने से पुनीत महोदय योग के चलते तीर्थ में पूरे दिन श्रद्धालुओं ने मां ललिता देवी मंदिर, व्यास गद्दी, हनुमान गढ़ी, सूत गद्दी, शौनक गद्दी, देवदेवेश्वर, कालीपीठ, बाला जी मंदिर आदि धर्म स्थलों में देव दर्शन, पूजन किया। देर शाम तक दान का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु को समर्पित श्री विष्णु सहस्त्रनाम पाठ, श्री सत्यनारायण व्रत कथा आदि अनुष्ठानों के आयोजन के साथ ही पीपल के पेड़ का विधिवत पूजन किया। अपने पितरों की अक्षय तृप्ति के लिए पिंड दान और श्राद्ध भी किया।
गोमती में खड़े होकर ब्राह्मी का किया पान
पान माघ मास की चतुर्दशी की रात को शुभ मुहूर्त में वैदिक पूजन के साथ नदी के बीच में खड़े होकर वैदिक रीति से तैयार ब्राह्मी पीने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस समय ब्राह्मी पीने से मां सरस्वती और मां गायत्री की कृपा बनी रहती है। नैमिष तीर्थ में रात में बड़ी संख्या में लोगों ने गोमती नदी के बीच खड़े होकर ब्राह्मी का पान (गृहण) किया।
...अब सब हो रहा ठीक
प्रशासन की ओर से चक्रतीर्थ और घाटों के पास स्नान करने की छूट मिलने के बाद उमड़ी आस्था को देखकर स्थानीय लोगों में खुुशी का ठिकाना नहीं है। लोगों का कहना है कि अब पर्यटन में तेजी की उम्मीद जगी है, इससे वह उत्साहित हैं। तीर्थ पुरोहित त्रिलोकीनाथ महाराज ने बताया कि कोरोना काल काफी भयावह था। अब धीरे-धीरे सब ठीक होता दिख रहा है। महंत बिहारी लाल ने भी नियमों के साथ स्नान आचमन की छूट को अच्छी पहल बताया। व्यवसायी घनश्याम गुप्ता ने तीर्थ की अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे पटरी पर आने की उम्मीद जताई।
भंडारे में छका प्रसाद
लहरपुर/हरगांव (सीतापुर)। मौनी अमावस्या पर लहरपुर के अकबरपुर के निकट प्रसिद्ध सूर्य कुंड मंदिर प्रांगण में पवित्र सरोवर में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। स्नान ध्यान कर मंदिरों में दर्शन किया। मौनी अमावस्या के पर्व पर सूर्य कुंड मंदिर प्रांगण में जगह-जगह लोगों ने मान्यताओं के अनुसार हवन पूजन कर भंडारों का आयोजन किया। भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर प्रांगण में लगे मेले में बच्चों ने लुत्फ उठाया। इसी तरह से हरगांव में स्थित सूर्यकुंड में भी श्रद्धालुओं ने शुभ मुुहूर्त में डुबकी लगाई।
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