सीतापुर। बेसिक शिक्षा के स्कूलों में नौनिहालों को टाट-पट्टी से निजात मिलेगी। बच्चे कुर्सी-मेज पर बैठकर पढ़ाई करेंगे। इन व्यवस्थाओं के लिए विधायक अपने क्षेत्रों के विद्यालयों को निधियां देंगे। ये आदेश शासन ने 18 साल पहले जारी किया था। पर इसे अमली जामा पहचाना नहीं जा सका है। ऐसे में अब करीब 1148 विद्यालयों को फायदा मिलेगा।
बेसिक शिक्षा विभाग में जिले में 3015 प्राथमिक व 1148 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में करीब छह लाख नौनिहाल अध्ययनरत हैं। 1148 में से 155 विद्यालयों में फर्नीचर क्रय करने के लिए शासन ने बजट दिया है। मगर अभी तक इन विद्यालयों में फर्नीचर खरीद नहीं हो पाई है। टेंडरिंग प्रक्रिया चल रही है।
शासन ने वर्ष 2001 में विधायक निधि से विद्यालयों में फर्नीचर व पुस्तकें उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। बावजूद इसके अधिसंख्य माननीयों ने इस आदेश को अमलीजामा पहनाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। शायद यही वजह है कि परिषदीय व अनुदानित विद्यालयों में फर्नीचर क्रय नहीं किए जा सके।
फर्नीचर व्यवस्था न होने से नौनिहाल टाट-पट्टी पर बैठकर शिक्षा अर्जित करने को मजबूर हैं। परिषदीय व अनुदानित विद्यालयों में फर्नीचर क्रय करने के लिए विधायक निधियां न दिए जाने की शिकायतों को शासन ने गंभीरता से लिया। इस पर शासन ने आदेश जारी किया है।
ग्राम्य विकास विभाग के विशेष सचिव सुरेश कुमार ने सीडीओ को पत्र में कहा कि कतिपय जिलों से शिकायत प्राप्त हो रही है कि प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक परिषदीय विद्यालयों, राजकीय एवं मान्यता प्राप्त तथा अनुदान प्राप्त स्कूलों के लिए आवश्यक फर्नीचर एवं पुस्तकों को खरीदने के लिए विधायक निधि से धनराशि अवमुक्त नहीं की जा रही है।
पूर्व से ही शासनादेश जारी है, जिसके तहत विधायक अपने क्षेत्रों के विद्यालयों में फर्नीचर व पुस्तकों को क्रय करने के लिए निधियां दे सकते हैं।