कलेजे के टुकड़े को 10 दिन बाद पाकर पिता के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। कभी वह अपने लाल का माथा चूमता तो दूसरे ही पल आरपीएफ जवानों को दिल से दुआ देता। दरअसल, पानीपत से एक दिसंबर को लापता हुआ ऋषभ रास्ता भटककर करीब 485 किलोमीटर दूर सीतापुर पहुंच गया।
यहां आरपीएफ जवानों ने स्कूली यूनिफार्म पहने मासूम को रोककर पूछा तो मामला खुला। उधर, बेटे की तलाश में भटक रहे परिवारीजनों को जब सीतापुर से ऋषभ की सलामती की खबर पहुंची तो परिवार अगले ही पल वहां से चल दिया। शनिवार को आरपीएफ ने ऋषभ को सीतापुर पहुंचे उसके पिता कमलेश के हवाले कर दिया।
दरअसल, हरदोई के मझिला के बुढ़ानपुर निवासी कमलेश 10 साल से पानीपत में रहकर साईं डाई हाउस में मजदूरी करता है। उसकी पत्नी की मौत चुकी थी। वह अपने दस साल के बेटे ऋषभ का पालन पोषण करता है। मासूम पानीपत के न्यू लक्ष्मी मॉडर्न पब्लिक स्कूल में कक्षा एक में पढ़ता है।
एक दिसंबर को ऋषभ अचानक स्कूल से लापता हो गया। परिवार वालों ने काफी तलाश की लेकिन पता नहीं चला। पिता ने पानीपत के मॉडल टाउन थाने में तीन दिसंबर को गुमशुदगी दर्ज करा दी। उधर, ट्रेन में बैठकर ऋषभ सीतापुर पहुंच गया।
यहां आठ दिसंबर को सिटी रेलवे स्टेशन पर स्कूल यूनिफार्म में घूमते समय आरपीएफ चौकी प्रभारी एके सिंह की उस पर नजर पड़ गई। उन्होंने तहकीकात की तो मामला खुला। बकौल चौकी प्रभारी बच्चा काफी डरा हुआ था। स्कूल यूनिफार्म के मोनोग्राम से पता चला कि वह पानीपत के एक स्कूल में पढ़ता है।
तत्काल पानीपत पुलिस को व्हाट्सएप पर बच्चे की फोटो व अन्य जानकारी भेजी गई। वहां की पुलिस ने सभी थानों से वायरलेस पर सूचना दी। जिसके जरिए बच्चे की गुमशुदगी दर्ज करने वाले थाने की पुलिस से संपर्क हुआ।
जानकारी साझा करने पर बच्चे के पिता का नंबर व पता मिल गया। इस पर सिटी स्टेशन आरपीएफ चौकी प्रभारी ने बच्चे के पिता से संपर्क कर उसे यहां बुलाया। शनिवार को पहुंचे कमलेश ऋषभ को देखते ही रोने लगे। चौकी प्रभारी एके सिंह ने बताया कि बालक का पिता अपने बेटे को पाकर बेहद खुश है।