अगर आप अपने या किसी मरीज के इलाज के लिए पिसावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जा रहे हैं तो बहुत कुछ संभव है कि आप को निराश ही होना पड़े। वजह यह कि इस स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों को कोई भी दवा नहीं मिल पाती। यही नहीं, हो सकता है चिकित्सक आपको बाहर से ही दवाओं को खरीदने का सुझाव दे दे।
अगर गरीबी का हवाला देकर अस्पताल से ही दवाओं की मांग करेंगे तो औषधि भंडार में मौजूद कोई भी लाल-पीली टेबलेट आपको थमाई जा सकती है। इससे आप या आप का मरीज स्वस्थ ही हो जाएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं। यहां मामूली सर्दी-जुकाम या खासी तक की दवा नहीं है। पैरासिटामॉल समेत एंटीबॉयटिक या पेनकिलर दवाओं का तो हमेशा टोटा ही बना रहता है।
क्षेत्र स्थित इस स्वास्थ्य केंद्र पर इस समय सभी दवाओं की कमी बनी हुई है। इस अस्पताल में रोजाना औसतन सौ मरीज आते हैं। पर किसी को यहां से दवा नहीं मिल पाती। यहां तक कि बच्चों के दिया जाने वाला सीरप तक नहीं है। खांसी का सीरप भी लंबे समय से नहीं है। कोई एंटीबॉयटिक या पेनकिलर तक नहीं है। पैरासिटामॉल की तो अरसे से किल्लत बनी हुई है।
यहां आने वाले मरीजों को बाजार से ही दवाएं खरीदनी पड़ती है। पिसावां के इस अस्पताल में इलाज के लिए रोजाना एक सैकड़ा से अधिक मरीज आते है। किसी को भी समुचित स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पाती। चिकित्सकों का कहना है पांच साल तक के बच्चों को सीरप के माध्यम से ही दवा दी जाती है लेकिन यहां पर बच्चों के लिए एक भी सीरप नहीं है।
खासी व एंटी एलर्जिक दवाएं भी काफी दिन से नहीं है। स्वास्थ्य महकमे का कहना है हर महीने की शुरुआत में ही पूरे माह की दवा दे दी जाती है लेकिन इस समय बहुत कम दवा आ रही है। हाल ये है जो भी स्टॉक मिलता है वह 15 से 20 दिन के अंदर ही समाप्त हो जाएगा। महीने के आखिरी में पैरासिटामॉल, एंटीबायोटिक, पेनकिलर सहित सभी दवाएं भी समाप्त हो जाती है। इससे मरीजों को बहुत दिक्कत होती है।