औरंगाबाद (सीतापुर)। मिश्रिख का औरंगाबाद इलाका आम पट्टी के लिए मशहूर है। इस बार आम की बढि़या पैदावार हुई है। आम की फसल तैयार होने से पहले आंधी कम आई और फसलों पर कीटों का प्रकोप भी कम रहा है। अच्छा उत्पादन होने से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। अब एक जून से आम की मंडी खुलने वाली है तो बागवान अच्छे रेट मिलने की उम्मीद लगाए हैं। पिछले साल की अपेक्षा इस बार करीब 30 फीसदी अधिक उत्पादन हुआ है।
औरंगाबाद के भानपुर, परसपुर, अटवा, कल्ली, रहीमाबाद, रौतापुर, हसनगंज, जमुनापुर, आंट, भैरमपुर, गोंदलामऊ, हीरापुर, सिद्दीकपुर, पहला, हथिया व लुधौरा आदि गांव में आम की बागवानी की जाती है। किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार मौसम फसल के अनुकूल रहा है। आंधी व ओलावृष्टि न होने से फसल सुरक्षित है। इस बार फसल को कीटों और तरह-तरह के लगने वाले रोगों से बचाने के लिए कीटनाशक काफी असरदार रहा। दवाओं के चलते लागत भी तीन गुना तक बढ़ गई है। ऐसे में आम बागवान अब एक जून को खुलने वाली मंडी के भाव पर निगाह लगाए हैं। वह 3500 रुपये प्रति क्विंटल मिलने पर ही बढि़या मुनाफा मिलने की उम्मीद लगाए हैं।
फसल का रेट बाहरी व्यापारियों पर निर्भर
औरंगाबाद के बागवान आमतौर संडीला, सीतापुर व लखनऊ मंडी में फसल बेचने जाते हैं। वहीं महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, पश्चिम बंगाल, दिल्ली व बिहार से सीधे व्यापारी आते हैं। वह फसल देखकर उसका रेट तय करके ले जाते हैं। बागवानों का कहना है यह व्यापारी मंडी से अच्छा रेट देते हैं। इस बार इन व्यापारियों पर निर्भर है यह कैसा रेट देंगे।
अच्छा रहा है मौसम
बागवान नबील बेग ने बताया कि इस बार मौसम फसल के अनुकूल रहा है। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, आंधी आदि से फसल अब तक सुरक्षित है। बागवानी में होने वाले महंगे खर्चों के चलते मुनाफा तभी संभव है, जब रेट अच्छे मिलेंगे।
30 फीसदी बढ़ा उत्पादन
बागवान ताहिर ने बताया कि बीते दो वर्षों से मौसम की बेरुखी, अच्छे रेट न मिलने और उत्पादन में कमी के चलते बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। बीते वर्षों की तुलना में इस बार 30 फीसदी तक उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। यदि रेट अच्छे मिलते हैं तो मुनाफा होने की उम्मीद है।
अच्छा होगा मुनाफा
बागवान रामनाथ ने बताया कि बागवानों को नुकसान से बचने के लिए अब एक जून से मंडी खुलने पर तय होने वाली कीमत ही बचा सकती है। यदि निर्यात बेहतर हुआ और इस बार आम यदि 2500 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिका तो अच्छा मुनाफा होगा।
कई गुना बढ़ी लागत
बागवान बताते है कि आम के पेड़ में दिसंबर व जनवरी में बौर आता है। मई के अंत या जून के प्रथम सप्ताह तक फसल पूरी तरह तैयार हो जाती है। इस बार दिसंबर और मई माह के मध्य तक छह से आठ बार तक महंगी दवाओं का फसल पर छिड़काव करना पड़ा है। इससे लागत बढ़ गई है।