सीतापुर। जिले में जेष्ठ के आखिरी मंगल को लेकर खासी धूम रही। सुबह से ही ‘को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो...’ सहित अन्य भजनों से मंदिर गुंजायमान हो गए। श्रद्धालुओं के उमड़ने के साथ ही भंडारा और शर्बत वितरण स्टॉलों की संख्या भी काफी अधिक रही। लगभग हर गली-चौराहे पर पूड़ी सब्जी खिलाई गई। भंडारे में शर्बत भी पिलाया गया। महावीर भगवान की कृपा पाने के लिए मंदिरों में विशेष अनुष्ठान किए गए।
ज्येष्ठ के आखिरी मंगल को लेकर जिले में खूब उत्साह रहा। शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक श्रद्धालु भगवान महावीर की भक्ति में डूब गए। पूजन-अर्चन और भंडारा की तैयारियां भोर से ही शुरू हो गई थी। जिन स्थानों पर भंडारा की व्यवस्था थी, वहां भक्तों ने तैयारियां और मुकम्मल कर ली थी। मंदिरों की साफ-सफाई करके प्रभु का श्रंगार शुरू हो गया था।
शहर के छोटा हनुमान मंदिर, बड़ा हनुमान मंदिर, हनुमान मंदिर नैपालापुर, आंख अस्पताल रोड स्थित हनुमान मंदिर, हनुमानगढ़ी नैमिषारण्य आदि मंदिरों में हनुमान जी का विशेष श्रंगार किया गया। दरबार को फूल मालाओं से सजाकर बालाजी सरकार को चोला अर्पित किया गया। महाआरती उतारी गई। इसके बाद श्रद्धालुओं के दर्शन का दौरा शुरू हो गया, जो देर रात तक चला।
ज्यादातर भक्तों ने सामाजिक दूरी का पालन किया। भीड़ बढ़ने में कुछ लोग कोविड प्रोटोकॉल को ताक पर रखते नजर आए। जागरूक लोगों ने टोका-टाकी करके सोशल डिस्टेंसिंग को दोबारा मेंटेन कर लिया। श्रद्धालुओं के संख्या ज्यादा होने की वजह से प्रसाद विक्रेताओं और मालियों की ठीक-ठाक आमदनी हो गई। देर रात अच्छी बिक्री होने के चलते उनके चेहरे खिले रहे।
तीर्थ नगरी में गूंजी सुंदर कांड की चौपाई
नैमिषारण्य। तीर्थनगरी नैमिषारण्य में ज्येष्ठ के चौथे व आखिरी मंगल को जगह-जगह सुंदर कांड का आयोजन किया गया। सिद्धेश्वर मंदिर, हनुमान गढ़ी, अयोध्या धाम के साथ ही छोटे-बड़े आश्रमों और घरों में संगीतमय सुंदर कांड का पाठ किया गया। वाद्य यंत्रों की ताल पर भक्तों ने लय मिलाई तो मन मगन हो गया।
हनुमान गढ़ी की आरती को सोशल मीडिया पर लाइव किया गया। मां ललिता देवी मंदिर और देव देवेश्वर धाम में कई श्रद्धालुओं ने अखंड पाठ कराया और मंगलवार को समापन पर भंडारा आयोजित किया।