सीतापुर। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों का लिवर प्रभावित हो रहा है। हर 10 में 6 लोग लिवर से जुड़ी बीमारी से परेशान हैं। फैटी व एल्कोहलिक लिवर के अधिक मरीज आ रहे हैं। चिकित्सक इसके पीछे सबसे मुख्य कारण बाहर का खानपान व धूम्रपान बता रहे हैं।
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. गौरव मिश्रा ने बताया कि अस्पताल आने वाले अधिकतर मरीजों में लिवर से जुड़ी बीमारी मिल रही है। अगर बुखार भी आता है तो हम लोग लिवर की जांच करवाते हैं। ऐसे में 10 में छह मरीजों में लिवर की दिक्कत जरूर मिलती है।
लिवर की जांच में प्रमुखता से यह निकलकर आता है कि फैटी व एल्कोहलिक लिवर है। मरीजों से जब उनकी हिस्ट्री पता की जाती है तो मालूम होता है कि वह रेगुलर ध्रूमपान कर रहे हैं। शराब का सेवन भी कर रहे हैं। इन दोनों कारणों से लिवर अधिक प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा जंक फूड, फसलों के उत्पादन में रासायनिक का प्रयोग करना का कारण है। इससे लिवर कमजोर हो रहा है। उन्होंने बताया कि असंतुलित खानपान हमारे शरीर के प्रमुख अंग लिवर को प्रभावित कर रहा है।
8 से 60 साल तक के आते हैं मामले
आजकल के दौर में बच्चों का भी लिवर डैमेज हो रहा है। हालांकि ऐसे बच्चों की संख्या जरूर कम है लेकिन प्रभावित जरूर हो रहा है। बच्चे जंक फूड खाते हैं। समय से भोजन नहीं करते हैं। तले-भुने खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं। इससे वह लिवर से जुड़ी बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। आठ से 60 साल तक के लोगों का लिवर डैमेज हो रहा है।
लिवर सुरक्षित रखने के यह हैं बेहतर उपाय
चिकित्सक डॉ. गौरव मिश्रा बताते हैं कि अपना खानपान सामान्य रखें। तली-भुनी चीजों से परहेज करें। शराब व धूम्रपान न करें। समय से भोजन लें। भोजन में हरी सब्जियां व फलों का सेवन करें। नियमित व्यायाम करते रहे। जंक फूड न खाएं
जिला अस्पताल में मौजूद हैं सुविधाएं
जिला अस्पताल में लिवर की जांच से लेकर बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध है। अस्पताल में हेपेटाइटिस बी व सी जैसी बीमारियों की महंगी जांच भी निशुल्क होती है। वायरल लोड जो प्राइवेट में करीब 4500 रुपये की जांच है वह यहां पर निशुल्क होती है। इसके अलावा हेपेटाइटिस सी के इलाज में एक माह में करीब 10 हजार की दवाएं लगती है। वह भी अस्पताल में निशुल्क है।
रोजाना करीब 300 मरीजों का जांचा जाता है लिवर
जिला अस्पताल की पैथाेलॉजी की क्षमता करीब 500 मरीजों की है। एक दिन में करीब 250 मरीजों की केवल लिवर की ही जांच होती है। चिकित्सकों का कहना है कि अधिकतर चिकित्सक लिवर की जांच जरूर लिखते है।