औरंगाबाद(सीतापुर)। रमजान का पहला रोजा बड़ों के साथ-साथ मासूम बच्चों ने भी रखा। कई बच्चों की जिंदगी का यह पहला रोजा था। तपती धूप और गर्मी से बेपरवाह बच्चों ने अल्लाह और उसके रसूल की रजा हासिल करने के लिए भूख और प्यास की शिद्दत बर्दाश्त कर पूरी दुनिया से कोरोना के खात्मे की दुआ की।
बुधवार को पहले रोजे में ही भीषण गर्मी ने रोजेदारों का इम्तिहान लिया। जिन बच्चों ने पहली बार रोजा रखा उनके परिवार वालों ने उनकी हौसलाअफजाई की। शाम को इफ्तार के वक्त बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। रोजा खोलते वक्त सभी ने अल्लाह से दुनिया भर में कोरोना खत्म करने की दुआ मांगी। औरंगाबाद, बीबीपुर, अराबगंज व कमइपुर आदि में ऐसे अनेक बच्चे हैं, जिनकी जिंदगी का यह पहला रोजा था। सभी ने घर पर ही नमाज और कुरान की तिलावत की। बाद में घर पर परिवार के साथ रोजा इफ्तार किया गया।
बच्चे बेसब्री से कर रहे थे रमजान का इंतजार
आठ साल की आलिया बताती है कि पहली बार रोजा रखा है। पिछले कई महीने से रमजान के मुबारक महीने का इंतजार कर रहे थे। पहला रोजा रखकर अल्लाह से कोरोना खत्म करने की दुआ मांगी है। 10 साल के अनस ने बताया कि खुदा की खुशनूदी हासिल करने के लिए भूख और प्यास को बर्दाश्त करना बड़ी बात नहीं है। उनके रोजा रखने पर पूरे घर में खुशी का माहौल है। 11 साल की अल्फिसा कहती हैं कि उनके रोजा रखने पर मां ने उनके खाने के लिए कई पकवान बनाए हैं। उन्हें रोजा रखकर बहुत अच्छा लग रहा है। आगे भी वह रोजा रखेंगी और अल्लाह से देश के अमन चैन की दुआ मागेंगी। सात साल की आफरीन कहती है कि उन्होंने पहली बार रोजा रखा है, बहुत अच्छा लग रहा है।