मछरेहटा इलाके में परिजनों को समझाती पुलिस। संवाद
सीतापुर। मछरेहटा इलाके में बृहस्पतिवार को बिजली की लाइन ठीक करते समय एक निजी लाइनमैन करंट की चपेट में आ गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। गुस्साए परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर सड़क पर शव रखकर जाम लगाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन परिजन नहीं माने। करीब एक घंटे बाद एसडीएम व बिजली विभाग के अफसरों ने पट्टे की जमीन व आर्थिक मदद दिलाने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन शांत हुए।
सदर कोतवाली इलाके के ग्राम ताजपुर निवासी आनंदराम मछरेहटा में निजी लाइनमैन के रूप में कार्य करते थे। बृहस्पतिवार को वह फॉल्ट ठीक करने के लिए भौआपुर गए थे। वह बिजली के खंभे पर चढ़कर लाइन ठीक कर रहे थे। इसी दौरान करंट की चपेट में आने से वह खंभे से गिर गए।उनके सिर व हाथ में गंभीर चोटें आईं। ग्रामीणों ने जिला अस्पताल पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर ट्राॅमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया। लखनऊ के रास्ते में ही आनंदराम की मौत हो गई। ग्रामीण शव को ताजपुर बरसंधियां से ठेलिया से गौरिया चौराहा की तरफ लेकर जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उनको रोकने का प्रयास किया। पुलिसकर्मियों ने ठेलिया को आगे नहीं बढ़ने दिया। इससे ग्रामीण भड़क गए और पुलिस से उनकी झड़प हो गई। फिर ग्रामीण शव को ठेलिया से उठाकर कंधे पर रखकर रात करीब आठ बजे गौरिया चौराहा पहुंचे। वहां सड़क पर शव रखकर जाम लगा दिया। सूचना पर शहर कोतवाली, मछरेहटा व खैराबाद थाने की पुलिस गौरिया चौराहा पहुंच गई। परिजन मुआवजे की मांग पर अड़े रहे। करीब एक घंटे बाद एसडीएम मिश्रिख अभिनव यादव व एसडीओ शैलेंद्र कुमार वर्मा मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने पीड़ित परिवार को जमीन का पट्टा दिलाने व एसडीओ ने आर्थिक मदद दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन शांत हुए।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक आनंदराम भूमिहीन थे। उनके पिता की बरसों पहले मौत हो गई थी। मां दोनों आंखों से देख नहीं सकती हैं। पत्नी व एक मासूम बच्चा है। पूरे परिवार की जिम्मेदारी आनंदराम के कंधों पर ही थी। उनकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां व पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है।
करंट से नहीं हुई मौत
मृतक आनंदराम बिजली विभाग के कर्मचारी नहीं थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में करंट लगने की बात सामने नहीं आई है। उनकी मौत गिरने से लगी चोट से हुई है। आनंदराम कहां बिजली ठीक कर रहे थे और कैसे गिरे? इसकी जानकारी नहीं है।
- शैलेंद्र राजपूत, अधिशासी अभियंता