सीतापुर। अपर सत्र न्यायाधीश राहुुल प्रकाश ने पत्नी की हत्या से जुड़े एक मामले में आरोपी पति को आजीवन कारावास के साथ ही 25 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमें की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता विवेक सिंह चौहान ने की।
उन्होंने बताया कि खैराबाद थाना क्षेत्र के महेशपुर चिलवारा निवासी छुटक्के ने अपनी पत्नी छोटी की हत्या के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ 11 मई 2013 को एक केस दर्ज कराया था। इसमें बताया गया कि 10/11 मई की रात वह अपने खेत में पानी लगाने गया था।
लौटकर आया तो घर पर उसे खून से लथपथ पत्नी की लाश मिली। पुलिस ने इस मामले में विवेचना करते हुए बाद में पति छुटक्के को ही आरोपी बनाया। न्यायालय में अभियोजन पक्ष की बहस सुनने व साक्ष्य देखने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने छुटक्के को ही अपनी पत्नी की हत्या का आरोपी पाते हुए उसे आजीवन कारावास व 25 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई। संवाद
चार हत्यारोपियों को उम्रकैद की सजा
सीतापुर। थाना पिसावां इलाके में 12 साल पहले पुरानी रंजिश में हुई हत्या के मामले में कोर्ट ने चार आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कैद की सजा सुनाते हुए दस-दस हजार का अर्थदंड भी लगाया है। 31 जुलाई 2009 की रात पिसावां के नारायनपुर के निवासी महेश के घर गांव के ही रहने वाले लल्लन, छंगा, धर्मेंद्र व गिरीश घुस आए।
इस दौरान विरोध करने पर हुई फायरिंग की चपेट में आने से महेश की मां की मौत हो गई थी। इस मामले में चारों आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। न्यायालय में अभियोजन साक्ष्य के उपरांत अपर सत्र न्यायाधीश राकेश वर्मा ने चारों हत्यारोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाते हुए अर्थदंड भी लगाया गया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता वशी अहमद ने की। संवाद
दहेज लोभी को दस वर्ष का कठोर कारावास
सीतापुर। दहेज में मोटरसाइकिल व 50 हजार रुपया न मिलने पर पत्नी की हत्या करने वाले एक पति को अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या 6 आबिद शमीम ने दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमे की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता गिरीश यादव ने की।
थाना अटरिया क्षेत्र के ग्राम कठवा निवासी परवेश यादव व उसके माता-पिता के खिलाफ दहेज में मोटरसाइकिल व 50 हजार न मिलने पर परवेश की पत्नी शिखा देवी की हत्या किए जाने का एक मुकदमा 27 अगस्त 2016 को दर्ज किया गया था। इस मामले का विचारण करते हुए न्यायाधीश ने परवेश के माता-पिता को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया लेकिन परवेश को घटना का दोषी पाते हुए दस वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई। संवाद