घाघरा व शारदा का जलस्तर बढ़ने से लगातार हालात बिगड़ते जा रहे हैं। बुधवार जलस्तर में वृद्धि के साथ ही कटान तेज हो गई। रेउसा व रामपुर मथुरा इलाके में नदियों में आए उफान से आठ मकान कट गए।
करीब 50 घरों पर कटान का खतरा मंडरा रहा है। सड़कों पर बहने लगी नदी। करीब 200 सैकड़ा गांवों में आवागमन ठप हो गया है। बाढ़ के पानी से घिरे इन गांवों में फंसे ग्रामीण आसपास के स्कूलों में छतों व मचान बनाकर शरण लिए हुए हैं।
वहीं जिनके घर पक्के हैं वह छत पर दिन बीता रहे हैं। हालांकि बुधवार को अफसरों ने क्षेत्र में पहुंचकर राहत कार्य शुरू किए। इसके बावजूद अभी सैकड़ों गांवों तक मदद पहुंचना बाकी है।
रेउसा में बुधवार को भी घाघरा व शारदा नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रही। हालांकि जलस्तर बढ़ने की गति धीमी होने से ग्रामीणों को अपनी गृहस्थी बटोरकर पलायन करने का मौका मिल गया। लेकिन कटान तेज होने से बाढ़ के घिरे गांवों में फंसे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
घरों में पानी घुसने से छतें लोगों का ठिकाना बन गई हैं। भदिम्मरपुरवा में सहजराम, विनीत, तिलंगी व श्यामलाल के आशियाने शारदा में समा गए। जबकि रामलालपुरवा में रहने वाले विक्रम, रामसुध, श्याम, देहाती, सुरेश के अलावा आस-पड़ोस के गांवों के 50 घरों पर कटान का खतरा बढ़ता जा रहा है।
रामपुर मथुरा प्रतिनिधि के अनुसार बुधवार को जलस्तर थमने से कटान तेज हो गया। अंगरौरा के मजरा पंडितपुरवा में जालिया, सरोजनी, शिव भगवान और दिलेराम के मकान घाघरा के पानी में समा गए।
वहीं पुष्पेंद्र का घर कटान के मुहाने पर है। कटान तेज होने से सहमे ग्रामीण सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन को मजबूर हैं। रामपुर मथुरा ब्लॉक में शुकलनपुरवा, कनरखी व अंगरौरा ग्राम पंचायतों के 27 मजरे बाढ़ से घिरे हैं।
करीब 400 बीघा घान की फसल पानी में डूब चुकी है। पंडितपुरवा के हरिशंकर, धीरज व सुरेंद्र बताते हैं, कि एक सप्ताह पहले तहसीलदार महमूदाबाद सर्वे करने आए थे। जिसके बाद सरकारी मदद तो दूर कोई अफसर हाल पूछने तक नहीं पहुंचा है।