तपती धूप में पसीना बहाने वाला मजदूर आज भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं है। उनके हितों के लिए चलने वाली सरकारी योजनाओं से मजदूर अंजान हैं। हालांकि श्रम विभाग सभी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का दावा कर रहा है। जिले में छोटे-बड़े करीब तीन हजार उद्योग हैं। इसमें काम करने वाले मजदूरों को मूलभूत सुविधाओं के साथ ही सुरक्षा के भी इंतजाम नहीं हैं।
मजदूरों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए बीमा, पेंशन, नि:शुल्क साइकिल वितरण समेत सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की चौदह योजनाएं चलाई जा रही हैं। लेकिन इनका लाभ उन तक नहीं पहुंच पाता है।
श्रम विभाग में पंजीकृत मजदूरों को मिलता सरकारी योजनाओं का लाभ
सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का लाभ श्रम विभाग में पंजीकृत मजदूर ही पा सकते हैं। जागरूकता के अभाव में ज्यादातर मजदूर अपना पंजीकरण नहीं कराते हैं। जिससे वह योजनाओं का लाभ पाने से वंचित रह जाते हैं। प्राय: मजदूर अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे होते हैं। ऐसे में उन्हें पंजीकरण की औपचारिकता पूरी करने में परेशानी होती है, और वह इससे वंचित रह जाते हैं।
श्रमिकों की प्रमुख समस्याएं
- गांवों में काम न मिलना।
- औद्योगिक क्षेत्रों में डेढ़ से दो हजार रुपये की मासिक मजदूरी पर 12 से 14 घंटे काम करना।
- ईंट भट्ठों व कारखानों पर बुनियादी सुविधाएं जैसे पेयजल, प्रसाधन व साफ आवास का अभाव।
- बीमारी या हादसे की स्थिति में समुचित स्वास्थ्य सेवा न मिलना।
पिछले एक साल में नहीं हुआ कोई हादसा
श्रम विभाग के मुताबिक पिछले एक साल के दौरान जिले में किसी मजदूर के साथ कोई हादसा नहीं हुआ है। न काम के दौरान किसी श्रमिक की जान गई है।
पंजीकृत श्रमिक को 60 साल के बाद मिलती पेंशन
पंजीकृत मजदूरों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ दिया जाता है। जिले में 26 हजार मजदूर पंजीकृत हैं। जिन्हें पंजीकरण के छह महीने बाद निशुल्क साइकिल दी जाती है। सामान्य मृत्यु पर आश्रित को एक लाख 24 हजार रुपये तथा काम के दौरान मृत्यु होने पर 5 लाख 25 हजार रुपये की सहायता मिलती है। पेंशन योजना में 60 वर्ष की उम्र के बाद पंजीकृत मजदूर को पेंशन भी मिलती है।
- केके सिंह, श्रम प्रवर्तन अधिकारी