क्षेत्र में ग्राम बढ़हीडीह निवासी ईश्वरदीन (60) की सोमवार को तबीयत बिगड़ी तो पुत्र राम लखन इलाज के लिए रेउसा सीएचसी ले गया। रामलखन के मुताबिक 12 किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचने तक पिता की स्थिति बिगड़ने लगी लेकिन वहां डॉक्टर तलाशे नहीं मिले। मजबूरन प्राइवेट चिकित्सक से इलाज कराना पड़ेगा।
घाघरा नदी के पार पचीसा गांव के फौजदार यादव दवाई लेने रेउसा अस्पताल गए थे। बताया कि गांव में रात के समय बीमार पड़ने पर लोगों को दिन का इंतजार करना पड़ता है। सुबह होने पर नाव से नदी पार करके मारू बेहड़ होते हुए 12 किलोमीटर दूरी तय कर रेउसा कस्बा पहुंचते हैं। इसके बाद भी इलाज मिलने की गारंटी नहीं होती।
टिब्भा निवासी पेशकार के मुताबिक सरकारी कागजों में तो स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध है लेकिन असल में ऐसा नहीं है। नजदीक उपचार की सुविधा के लिए गंगा पुरवा में पीएचसी खोला गया जिसमें आए दिन ताला बंद रहता है।
रेउसा सीएचसी पहुंचे टिब्भा के केशवराम के मुताबिक अस्पताल में एक्स रे की सुविधा नहीं है। सर्जन और अन्य गंभीर रोगों की जांच की भी सुविधा का अभाव है। रात में चिकित्सक मिलते ही नहीं हैं। ऐसे में लोगों को झोला छाप से इलाज कराने को मजबूर होना पड़ता है।
स्वास्थ्य सेवा होगी दुरुस्त
गंगा पुरवा स्वास्थ्य केंद्र की कमियों दूर कर स्वास्थ्य सेवा को दुरुस्त किया जाएगा। रेउसा सीएचसी की सेवाओं में भी सुधार लाया जाएगा। -डॉ. हरगोविंद सिंह, सीएमओ