सीतापुर। ईसाई धर्म के लोगों ने शुक्रवार को गुड फ्राइडे मनाया। इस दिन चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं हुईं। प्रभु यीशु के जीवन के अंतिम क्षणों को याद किया गया। प्रभु के बताए गए मार्गों पर चलने की सीख ली।
प्रभु यीशु लोगों को मानवता, एकता और अहिंसा का उपदेश देकर अच्छाई की राह पर चलने के लिए प्रेरित करते थे। ईसाई धर्म ग्रंथों के अनुसार बताया जाता है कि ईसा मसीह जेरुसलम में लोगों को ईश्वर का संदेश समझाते थे। मानव कल्याण के उपदेश देते थे, लोगों पर उनके उपदेशों का गहरा असर होता था। प्रभु यीशु के उपदेशों से प्रभावित होकर लोग ईसा मसीह को ईश्वर मनाने लगे थे।
इस तरह की घटना को देखते हुए धार्मिक अंधविश्वास करने वाले लोगों ने उन पर राजद्रोह का आरोप लगा दिया था, लोगों ने रोम के शासक से शिकायत कर दी। इस पर राजा ने मृत्युदंड का आदेश सुनाया। उनको कील की मदद से सूली पर लटका दिया गया। जिस दिन उन्हें सूली पर चढ़ाया गया, उस दिन को गुड फ्राइडे कहा जाता है।
गुड फ्राइडे प्रभु यीसु के बलिदान और पीड़ा का प्रतीक है। गुड फ्राइडे के मौके पर शहर के मेथोडिस्ट चर्च, बीसीएम अस्पताल के चर्च, सेक्रेड हार्ट इंटर व डिग्री कॉलेज के चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं हुईं। इन प्रार्थना सभाओं में लोगों ने प्रभु यीशु के जीवन के अंतिम क्षणों को याद किया। प्रभु यीशु के बताए गए मार्गों पर चलने की प्रेरणा ली।